अमेरिकी संसद में ट्रंप की ईरान नीति को झटका, युद्ध समाप्त करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित

अमेरिकी संसद में ट्रंप की ईरान नीति को झटका, युद्ध समाप्त करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित

Johar News Times
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वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में ईरान को लेकर जारी सैन्य अभियान के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई समाप्त करने और संघर्ष क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की मांग की है। प्रस्ताव 215 के मुकाबले 208 मतों से पारित हुआ।

इस मतदान की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने भी पार्टी लाइन से अलग जाकर प्रस्ताव का समर्थन किया। इससे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान युद्ध को लेकर सत्तारूढ़ दल के भीतर भी मतभेद उभरने लगे हैं। हालांकि यह प्रस्ताव तत्काल युद्ध समाप्त करने के लिए बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसे ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पिछले तीन महीनों से जारी संघर्ष को लेकर कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहमति अब खुलकर सामने आ गई है।

युद्ध संबंधी अधिकारों पर फिर छिड़ी बहस
प्रस्ताव में राष्ट्रपति से ईरान के खिलाफ सैन्य गतिविधियां समाप्त करने और अमेरिकी सेना को वापस बुलाने का आग्रह किया गया है। डेमोक्रेट सांसदों का आरोप है कि प्रशासन ने कांग्रेस की पूर्व स्वीकृति के बिना सैन्य कार्रवाई शुरू कर संवैधानिक प्रक्रियाओं और विधायी अधिकारों की अनदेखी की। इस मुद्दे ने 1973 के वार पावर्स एक्ट को लेकर बहस को भी तेज कर दिया है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को सीमित अवधि तक ही बिना कांग्रेस की अनुमति सैन्य कार्रवाई जारी रखने की छूट होती है। डेमोक्रेट नेताओं का दावा है कि ईरान संघर्ष के मामले में यह समयसीमा समाप्त हो चुकी है। वहीं ट्रंप प्रशासन का कहना है कि सैन्य कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए आवश्यक थी और संघर्ष अब प्रभावी रूप से नियंत्रण में है।

रिपब्लिकन सांसदों के रुख ने बढ़ाई चिंता
मतदान के दौरान चार रिपब्लिकन सांसदों का प्रस्ताव के पक्ष में जाना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों और युद्ध से जुड़े आर्थिक प्रभावों को देखते हुए कई सांसदों की चिंता बढ़ी है, जिसका असर मतदान में दिखाई दिया।

अब सीनेट की ओर टिकी निगाहें
प्रतिनिधि सभा से पारित होने के बाद यह प्रस्ताव अब अमेरिकी सीनेट में पेश किया जाएगा। हालांकि वहां इसे मंजूरी मिलना आसान नहीं माना जा रहा है। यदि दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित भी हो जाता है, तब भी राष्ट्रपति ट्रंप के पास वीटो का अधिकार रहेगा। इसके बावजूद राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मतदान ट्रंप प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। इससे स्पष्ट संकेत मिला है कि ईरान युद्ध को लेकर कांग्रेस के भीतर समर्थन कमजोर पड़ रहा है और आने वाले दिनों में युद्ध संबंधी अधिकारों तथा विदेश नीति पर बहस और तेज हो सकती है।

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