Jamshedpur: NSU में ‘माइंडटेक’ राष्ट्रीय कार्यशाला, मानसिक स्वास्थ्य और तकनीक के संगम पर विशेषज्ञों ने साझा किए नए विचार

पोखारी स्थित नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय कार्यशाला “माइंडटेक: रीइमेजिनिंग मेंटल हेल्थ थ्रू रिसर्च, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी” का सफल आयोजन किया गया।

Johar News Times
3 Min Read

पोखारी स्थित नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय कार्यशाला “माइंडटेक: रीइमेजिनिंग मेंटल हेल्थ थ्रू रिसर्च, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी” का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल और नेशनल एसोसिएशन ऑफ मेंटल हेल्थ एंड अलाइड हेल्थ फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, शोध और नवाचार की भूमिका पर व्यापक विमर्श करना था। इस दौरान देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षकों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डिजिटल मेंटल हेल्थ इंटरवेंशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा आधारित शोध, क्लिनिकल प्रैक्टिस में नवाचार, नैतिक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं जैसे विषयों पर गहन चर्चा की।

विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य में तकनीक की भूमिका पर रखे विचार

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज, पुणे की असिस्टेंट प्रोफेसर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रेरणा दीक्षित और IIIT रांची के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जयदीप पति शामिल हुए। दोनों विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और आधुनिक बनाने में तकनीक और शोध की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. जयदीप पति ने बताया कि डेटा आधारित रिसर्च और एआई तकनीक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जबकि लेफ्टिनेंट कर्नल प्रेरणा दीक्षित ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुसंधान और नवाचार पर दिया जोर

कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि, कुलसचिव नागेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोईज अशरफ, IQAC निदेशक डॉ. श्रद्धा वर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य आज एक गंभीर वैश्विक मुद्दा बन चुका है और युवाओं में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “माइंडटेक” जैसी कार्यशालाएं नई सोच और शोध को बढ़ावा देती हैं। कुलपति प्रो. पाणि ने कहा कि तकनीक और शोध के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और डिजिटल युग में AI आधारित अध्ययन नए अवसर प्रदान कर रहा है।

देशभर से 100 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता
दो दिवसीय इस कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव बताया। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Share This Article