ज्योतिष शास्त्र में ‘छाया ग्रह’ और मोक्ष के कारक माने जाने वाले केतु जल्द ही अपना नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं। 29 मई 2026 को केतु मघा नक्षत्र के तीसरे पद में प्रवेश करेंगे, जहां वे 30 जून 2026 तक (अगले 32 दिनों तक) विराजमान रहेंगे। मघा नक्षत्र के इस चरण के स्वामी बुध हैं। बुध को बुद्धि, तर्कशक्ति और व्यापार का कारक माना जाता है, इसलिए केतु का यह गोचर सीधे तौर पर लोगों के कामकाजी फैसलों और मानसिक स्थिति को प्रभावित करेगा। ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, इस गोचर से मिथुन, कन्या और मीन राशि के जातकों को करियर, आर्थिक मामलों और सेहत को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।
इन 3 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान
1. मिथुन राशि (Gemini) – निर्णय लेने में होगी परेशानी
केतु का यह गोचर आपके लिए मानसिक द्वंद्व और भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। चूंकि इस पद के स्वामी बुध स्वयं आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए आपकी निर्णय लेने की क्षमता सबसे ज्यादा प्रभावित होगी।
- करियर और व्यापार: कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या सीनियर अधिकारियों के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। बिजनेस में किसी भी नए निवेश या बड़ी डील पर साइन करने से पहले कागजातों को अच्छी तरह जांच लें।
- बड़ी सावधानी: इस अवधि में “शॉर्टकट” से धन कमाने के चक्कर में न पड़ें, अन्यथा बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है।
2. कन्या राशि (Virgo) – भ्रम और गुप्त शत्रुओं का खतरा
कन्या राशि वालों के लिए यह समय आत्म-मंथन और धैर्य रखने का है। केतु का प्रभाव आपको लक्ष्यों से भटका सकता है।
- करियर और व्यापार: ऑफिस में आपके काम का क्रेडिट कोई और लेने की कोशिश कर सकता है। मेहनत का परिणाम देरी से मिलने के कारण स्वभाव में झुंझलाहट बढ़ सकती है।
- बड़ी सावधानी: सेहत के मामले में लापरवाही भारी पड़ सकती है। किसी अनजान व्यक्ति पर आंख मूंदकर वित्तीय भरोसा न करें। गुप्त शत्रु आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।
3. मीन राशि (Pisces) – बजट और रिश्तों पर पड़ेगा असर
मीन राशि के जातकों के लिए यह गोचर वाणी दोष (गलत भाषा) और पारिवारिक तनाव का कारण बन सकता है।
- करियर और व्यापार: आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। अचानक आए अनावश्यक खर्चों के कारण आपका बजट बिगड़ सकता है। इस दौरान की गई व्यापारिक यात्राएं फलदायी नहीं होंगी।
- बड़ी सावधानी: वैवाहिक जीवन या प्रेम संबंधों में गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। बातचीत के दौरान कड़वे शब्दों के प्रयोग से बचें और अपनी बात स्पष्टता से रखें।
मघा नक्षत्र का प्रभाव: क्यों बढ़ सकती है ओवरथिंकिंग?
मघा नक्षत्र के देवता ‘पितर’ (पूर्वज) हैं। केतु का इस नक्षत्र में आना यह दर्शाता है कि इस अवधि में पुरानी पारिवारिक संपत्ति के मामले या पुराने पारिवारिक विवाद दोबारा उभर सकते हैं। वहीं, बुध के प्रभाव वाले इस पद में केतु व्यक्ति को अत्यधिक सोचने (Overthinking) पर मजबूर करता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है।
अशुभ प्रभाव से बचने के सरल ज्योतिषीय उपाय
यदि आपकी राशि मिथुन, कन्या या मीन है, तो केतु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए ये उपाय जरूर करें:
- भगवान गणेश की उपासना: बुध और केतु के अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए नियमित रूप से ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें।
- पक्षियों की सेवा: प्रतिदिन सुबह पक्षियों को सात प्रकार का अनाज (सप्तधान्य) खिलाएं।
- पितृ तर्पण और दान: चूंकि मघा नक्षत्र के स्वामी पितर हैं, इसलिए पूर्वजों के नाम पर किया गया दान-पुण्य और तर्पण इस समय विशेष लाभकारी रहेगा।
