लातेहार: एस्सार पावर प्लांट की 540 एकड़ जमीन ग्राम सभा करेगी वापस, पेसा कानून के तहत कंपनी को बेदखल करने का बड़ा फैसला

प्रशासनिक आदेश को ठेंगा दिखाना पड़ा भारी, अब कंपनी की संपत्ति पर भी होगा ग्राम सभा का मालिकाना हक!

Johar News Times
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झारखंड के लातेहार जिला अंतर्गत चंदवा प्रखंड में जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन सुलग उठा है। पूर्व में एस्सार पावर झारखंड लिमिटेड और वर्तमान में उड़ीसा एलॉय स्टील प्राइवेट लिमिटेड को पावर प्लांट लगाने के लिए दी गई 540 एकड़ भूमि को ग्राम सभा द्वारा वापस लेने का ऐतिहासिक फैसला किया गया है।

चकला गांव में आयोजित इस महा-ग्रामसभा की अध्यक्षता ग्राम प्रधान प्रयाग गंझू ने की, जबकि संचालन रामदिवाली गंझू ने किया। इस बैठक में प्लांट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच प्रभावित गांवों— अनगाड़ा, चतरो, अरधे, तुपी और चकला के हजारों ग्रामीण और रैयत शामिल हुए।

“जमीन प्लांट के लिए दी थी, बेचने के लिए नहीं” — ग्राम प्रधान

बैठक को संबोधित करते हुए ग्राम प्रधान प्रयाग गंझू ने दो टूक शब्दों में कहा, “हमने पावर प्लांट लगाने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन एस्सार कंपनी को दी थी, उसे आगे बेचने के लिए नहीं। जब कंपनी नियमों का उल्लंघन कर रही है, तो रैयत अपनी जमीन वापस लेकर रहेंगे।”

2005 से शुरू हुआ सफर और 2025 में आया नया संकट

ग्राम सभा में ग्रामीणों ने पूरे मामले की क्रोनोलॉजी को सामने रखा:

  • वर्ष 2005-06: पांचों गांवों के रैयतों ने एक समझौते के तहत लगभग 540 एकड़ जमीन कंपनी को रजिस्ट्री की थी। एस्सार कंपनी ने 10-12 वर्षों तक काम किया और 21 सूत्री समझौते का पूरी तरह पालन किया।
  • वर्ष 2014: सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोल ब्लॉक आवंटन रद्द किए जाने के बाद एस्सार कंपनी का काम धीरे-धीरे बंद हो गया।
  • एनसीएलटी का दखल: बैंकों के कर्ज के कारण मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल गया। वहां नियुक्त लिक्विडेटर फर्म ने भी रैयतों के हितों को सुरक्षित रखा और उन्हें गुजारा भत्ता देना जारी रखा।
  • 3 मार्च 2025: एनसीएलटी के आदेश पर इस प्लांट को नई कंपनी उड़ीसा एलॉय स्टील प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया गया।

नई कंपनी का अमानवीय रुख और भुखमरी की नौबत

ग्रामीणों का आरोप है कि नई कंपनी ने आते ही सारे नियमों को ताक पर रख दिया। कंपनी ने रैयतों के साथ हुए पुराने समझौते को मानने से साफ इनकार कर दिया और 31 मार्च 2025 से रैयतों को मिल रहे गुजारे भत्ते पर रोक लगा दी। इससे प्रभावित परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

प्रशासनिक आदेश को भी कंपनी ने दिखाया ठेंगा

इस गतिरोध को दूर करने के लिए लातेहार जिला प्रशासन ने पहल की थी। 17 जून 2025 को चंदवा अंचल कार्यालय में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में दोनों पक्षों की बैठक हुई थी। प्रशासन ने कंपनी को सख्त निर्देश दिया था कि 15 दिनों के भीतर प्रभावित रैयतों की नौकरी बहाल की जाए और उनके बकाए वेतन का भुगतान किया जाए। लेकिन कंपनी ने इस प्रशासनिक आदेश को भी ठुकरा दिया।

कंपनी के इस अमानवीय और अड़ियल रुख को देखते हुए ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से निम्नलिखित कड़े फैसले लिए हैं:

  • जमीन से बेदखली: ग्राम सभा ने पूर्व के इकरारनामे को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। पेसा कानून 2025 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए पांचों गांवों की जमीन से उड़ीसा एलॉय स्टील प्राइवेट लिमिटेड को बेदखल कर जमीन को अपने नियंत्रण में लेने का फैसला किया गया है।
  • संपत्तियों पर स्वामित्व: जमीन पर पूर्व में किए गए सभी निर्माणों और संपत्तियों को भी ग्राम सभा अपने मालिकाना हक और नियंत्रण में लेगी।
  • ग्राम कोष का गठन: भविष्य में इन जमीनों और संसाधनों का सामूहिक उपयोग किया जाएगा। इससे ‘ग्राम कोष’ का राजस्व बढ़ाया जाएगा ताकि प्रभावित रैयतों और ग्रामीणों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें और भुखमरी से निपटा जा सके।
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