चांडिल डैम पुनर्वास में बड़े घोटाले का आरोप: 25 कर्मचारियों के खिलाफ उपायुक्त से शिकायत, ACB जांच और आय से अधिक संपत्ति खंगालने की मांग

चांडिल डैम विस्थापितों का फूटा गुस्सा: 25 कर्मचारियों पर दलाली का आरोप, उपायुक्त से ACB जांच की मांग।

Johar News Times
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सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के तहत आने वाले चांडिल डैम विस्थापितों के पुनर्वास और मुआवजे में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और दलाली का एक गंभीर मामला सामने आया है। चांडिल डैम विस्थापित संघर्ष समिति के सचिव विवेक सिंह बाबू ने सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त को एक शिकायती आवेदन सौंपकर सनसनी फैला दी है। इस आवेदन में पुनर्वास और भू-अर्जन कार्यालयों में कार्यरत और सेवानिवृत्त कुल 25 कर्मचारियों के नामों का ब्योरा देते हुए उनके खिलाफ एसीबी जांच और आय से अधिक संपत्ति की जांच करने की मांग की गई है।

84 मौजा और 116 गांवों के विस्थापित 40 साल से परेशान विवेक सिंह का आरोप है कि चांडिल डैम जलाशय से प्रभावित 84 मौजा के 116 गांवों के विस्थापित पिछले 40 वर्षों से व्यवस्था और दलालों के हाथों शोषण का शिकार हो रहे हैं। मुआवजा भुगतान, प्लॉट आवंटन, नौकरी और पुनर्वास प्रमाण-पत्र जैसे हक के कामों के लिए विस्थापितों से मोटी अवैध वसूली की जाती है। दलालों के इस मकड़जाल के कारण वास्तविक लाभुक आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं।

इन 3 मुख्य चेहरों पर ‘सेटिंग-गेटिंग’ का सबसे गंभीर आरोप शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से तीन कर्मचारियों को इस पूरे कथित नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार बताया है, जिनके इशारे पर नियम-कानूनों को ताक पर रखकर “मनचाहा राज” चलाया जा रहा है:

  1. दारा प्रसाद मंडल – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल
  2. प्रसेनजीत घोष – अपर निदेशक कार्यालय, आदित्यपुर
  3. बादल बनर्जी – विशेष भू-अर्जन कार्यालय, चांडिल

आरोप है कि इन तीनों की ‘सेटिंग-गेटिंग’ के बिना कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। अगर कोई विस्थापित सीधे दफ्तर जाता है, तो उसे तरह-तरह के बहाने बनाकर भगा दिया जाता है। काम केवल तभी होता है जब दलाल या एजेंट के माध्यम से ‘आधा शेयर’ तय किया जाता है।

जांच के दायरे में आए ये 25 कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मी आवेदन में चांडिल पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, डैम डिवीजन-2, भू-अर्जन कार्यालय आदित्यपुर, और गांगूडीह समेत विभिन्न विभागों के वर्तमान व रिटायर्ड कर्मियों की सूची सौंपी गई है। नामजद प्रमुख लोग इस प्रकार हैं:

  • वर्तमान कर्मी: उत्तम पांडे, शम्भू कालिंदी, लक्ष्मी महतो, भीम घाटवाल, नारायण गोप, जानिक महतो, सिदम महतो, बेचाराम सिंह मुंडा, किरिटी महतो, सोनू महतो, सुधीर महतो, निवारण महतो, ब्रज गोराई, बीरेन प्रमाणिक।
  • सेवानिवृत्त कर्मी: दिलीप चटर्जी, तपन कुमार हाजरा, नागेंद्र प्रमाणिक, हेमन्त प्रमाणिक, खलील अंसारी, पंचानन कुम्हार, नारद महतो, रमाकांत दास।
  • पूरे प्रकरण की निगरानी ब्यूरो या एसीबी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • सभी नामजद वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मियों की चल-अचल संपत्ति की जांच कर ‘आय से अधिक संपत्ति’ का मामला दर्ज हो।
  • पुनर्वास कार्यालयों में बायोमेट्रिक हाजिरी, सीसीटीवी कैमरे और विस्थापितों के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ व हेल्प डेस्क बने।
  • 40 साल से लंबित दावों के निपटारे के लिए समयबद्ध विशेष कैंप लगाए जाएं।

प्रशासन का रुख: तथ्यों की हो रही है जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शिकायत पत्र प्राप्त हुआ है। विस्थापितों के आरोपों को देखते हुए प्राथमिक स्तर पर तथ्यों का सत्यापन और जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट में जो भी कर्मचारी या बिचौलिया दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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