झारखंड में इस वर्ष कम बारिश और संभावित सूखे के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। मौसम विभाग द्वारा सामान्य से कम वर्षा का पूर्वानुमान जारी किए जाने के बाद, कृषि विभाग ने किसानों को इस संकट से बचाने के लिए जिलावार आकस्मिक कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। किसानों को समय पर बीज, वैकल्पिक खेती की जानकारी और सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 20 मई को सभी जिलों में और 22 मई को प्रखंड स्तर पर वृहद ‘खरीफ मेलों’ का आयोजन किया जाएगा।
सूखे की तैयारियों को लेकर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा, “मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून कमजोर रहने और सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है। सरकार पहले से ही मुस्तैद है ताकि हमारे अन्नदाताओं को कम से कम नुकसान हो।”
मंत्री ने सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाते हुए सख्त निर्देश दिया है कि वे अपनी सभी कृषि इकाइयों के बीच तालमेल बिठाएं और “सेना की तरह” मुस्तैदी से काम करें। उन्होंने साफ किया कि खेती में समय सबसे मूल्यवान है, इसलिए बीजों और सिंचाई की व्यवस्था में कोई देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संभावित सूखे से निपटने के लिए सरकार ने कृषि की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है:
- वैकल्पिक खेती: कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऊंची जमीन वाले क्षेत्रों में मक्का, रागी, उड़द, मूंग, अरहर और सोयाबीन की खेती पर जोर रहेगा। साथ ही कम दिनों में तैयार होने वाली धान की किस्मों के बीज बांटे जाएंगे।
- 20 मई : इस मेले में प्रत्येक जिले से लगभग 500 प्रगतिशील किसानों को शामिल किया जाएगा।
- 22 मई: इस आयोजन में प्रत्येक पंचायत से 50 किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
- मेलों की खासियत: इन मेलों में किसानों को ऑन-द-स्पॉट मृदा जांच, उन्नत बीज वितरण, आधुनिक सिंचाई तकनीक और सरकारी अनुदान वाली योजनाओं की सीधी जानकारी मिलेगी।
कृषि मंत्री ने जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिया है कि मई के अंत तक राज्य के सभी तालाबों के जीर्णोद्धार (मरम्मत) का काम हर हाल में पूरा कर लिया जाए। इसके अलावा सोलर पंप, ड्रिप सिंचाई किट और पशु चिकित्सा दवाओं के वितरण के लिए टेंडर प्रक्रिया को तुरंत निपटाने को कहा गया है।
भूमिहीन किसानों को भी मिलेगा मुआवजा राहत की बात यह है कि सरकार ‘झारखंड राज्य फसल राहत योजना’ के तहत पूरी तरह तैयार है। यदि सूखा पड़ता है, तो फसल नुकसान की भरपाई के लिए न केवल रैयत बल्कि भूमिहीन किसानों को भी आर्थिक सहायता दी जाएगी।
