वट सावित्री व्रत 2026: 16 या 17 मई? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण विधि

हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है।

Johar News Times
3 Min Read

हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत न केवल पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है, बल्कि यह प्रेम और दृढ़ संकल्प का भी प्रतीक है। इस साल यह व्रत बेहद खास होने वाला है क्योंकि इस दिन शनि अमावस्या, शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

कब है वट सावित्री व्रत? (Tithi & Date)

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत मनाया जाता है।

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई, शनिवार – सुबह 05:11 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 16 मई, शनिवार – रात 01:32 बजे (मध्यरात्रि)
  • उदया तिथि के अनुसार: वट सावित्री का व्रत 16 मई 2026, शनिवार को ही रखा जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

शनिवार के दिन अमावस्या होने से इस दिन शनि अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। इस दिन पूजा के लिए सबसे उत्तम समय अभिजीत मुहूर्त माना जा रहा है:

  • शुभ मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक।

पूजा की संपूर्ण विधि (Puja Vidhi)

  1. स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और नए या साफ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें।
  2. स्थापना: पूजा स्थान पर भगवान विष्णु, माता सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करें।
  3. वट वृक्ष पूजन: बरगद के पेड़ (वट वृक्ष) के पास जाकर जल, रोली, अक्षत, फूल और भीगे हुए चने अर्पित करें।
  4. परिक्रमा: पेड़ की जड़ में दीपक जलाएं और वट वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत या मौली लपेटें।
  5. कथा: परिक्रमा के दौरान या बाद में सावित्री-सत्यवान की कथा का पाठ करें या सुनें।
  6. प्रार्थना: अंत में पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करें और आरती करें।

पूजा सामग्री लिस्ट (Samaagri Check-list)

पोर्टल के पाठक अपनी तैयारी के लिए इस सूची का उपयोग कर सकते हैं:

  • मुख्य सामग्री: कच्चा सूत या मौली, जल का लोटा, गंगाजल, बरगद का पेड़।
  • सुहाग सामग्री: चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, चुनरी।
  • खाद्य पदार्थ: फल, मिठाई, भीगे हुए चने, बताशे, पंचामृत।
  • अन्य: रोली, हल्दी, कुमकुम, अक्षत, धूप-दीप, कपूर, नारियल, सुपारी, पान के पत्ते और इलायची।

धार्मिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सावित्री ने इसी दिन यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाए थे। माना जाता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है, इसलिए इसकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Share This Article