हंता वायरस का बढ़ा खतरा: क्या कोरोना की तरह फिर मंडरा रहा है महामारी का संकट? जानें WHO की चेतावनी और सच्चाई

दुनियाभर में एक बार फिर वायरस की आहट ने चिंता बढ़ा दी है।

Johar News Times
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दुनियाभर में एक बार फिर वायरस की आहट ने चिंता बढ़ा दी है। इस बार चर्चा का केंद्र ‘हंता वायरस’ है, जिसने एक लग्जरी क्रूज शिप पर अपना कहर बरपाया है। डच झंडे वाले क्रूज शिप MV Hondius पर रहस्यमयी सांस संबंधी बीमारी के बाद हंता वायरस की पुष्टि हुई है। अब तक इस जहाज से जुड़े आठ मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पांच मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है और तीन लोगों की जान भी जा चुकी है। इस घटना के बाद वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने अलर्ट जारी कर दिया है, जिससे लोगों के मन में फिर से कोरोना जैसी महामारी का डर पैदा होने लगा है।

कैसे शुरू हुआ संक्रमण और क्या है WHO का पक्ष? विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इस क्रूज पर संक्रमण का पहला मामला 6 अप्रैल को सामने आया था और महज पांच दिनों के भीतर उस व्यक्ति की मौत हो गई। शुरुआती दौर में लक्षण सामान्य सांस की बीमारी जैसे होने के कारण हंता वायरस का संदेह नहीं हुआ, लेकिन जब अन्य यात्री भी बीमार पड़ने लगे, तब जांच में इस खतरनाक वायरस का खुलासा हुआ। हालांकि, WHO की एक्सपर्ट डॉ. मारिया वैन केरखोव ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि इसकी तुलना कोरोना (SARS-CoV-2) से करना सही नहीं है। हंता वायरस कोरोना की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता और इसमें संक्रमण का खतरा केवल बेहद करीबी और लंबे समय तक संपर्क में रहने पर ही होता है।

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संक्रमण फैलने का तरीका और ‘एंडीज स्ट्रेन’ का डर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, आमतौर पर हंता वायरस चूहों या उनके मल-मूत्र के संपर्क में आने से फैलता है। लेकिन इस क्रूज वाले मामले में ‘एंडीज स्ट्रेन’ होने का शक जताया जा रहा है। यह हंता वायरस का एक बेहद दुर्लभ प्रकार है, जिसमें इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की सीमित क्षमता होती है। यही कारण है कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य एजेंसियां इसे गंभीरता से ले रही हैं। राहत की बात यह है कि WHO फिलहाल वैश्विक स्तर पर इसके खतरे को कम आंक रहा है, लेकिन बंद जगहों जैसे क्रूज शिप या हॉस्टल में रहने वालों के लिए सतर्कता जरूरी बताई गई है।

निगरानी और सावधानी हंता वायरस की एक बड़ी चुनौती इसकी छह हफ्ते तक की लंबी इन्क्यूबेशन अवधि है। इसका मतलब है कि संक्रमित होने के कई हफ्तों बाद तक मरीज में लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी को देखते हुए उन 12 देशों में हाई अलर्ट जारी किया गया है, जहां के यात्री इस जहाज पर सवार थे। फिलहाल नीदरलैंड के डॉक्टरों और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल की टीमें जहाज पर मौजूद हैं और यात्रियों की सघन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि संक्रमण की शुरुआत कहां से हुई। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि घबराने के बजाय स्वच्छता का ध्यान रखें और चूहों की मौजूदगी वाली जगहों से दूर रहें।

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