ईचागढ़ में हाथी हमलों के बाद बढ़ा तनाव, वन अधिकारियों से दुर्व्यवहार पर छिड़ी बहस

ईचागढ़ में हाथी हमलों के बाद बढ़ा तनाव, वन अधिकारियों से दुर्व्यवहार पर छिड़ी बहस

Johar News Times
2 Min Read

मानव-हाथी संघर्ष में मौतों के बाद जनाक्रोश, संविधान में अधिकार और कर्तव्यों के संतुलन पर उठे सवाल,

सरायकेला-खरसावां : ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के कुकडू और तिरुलडीह इलाके में हाल में हुई मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। जंगली हाथियों के हमले में कई लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। इसी बीच घटनास्थल पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और अभद्रता का मामला सामने आने के बाद अब यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

- Advertisement -
Ad image

जानकारी के अनुसार तिरुलडीह और आसपास के जंगल क्षेत्रों में हाथियों के हमले में कई ग्रामीणों की जान गई थी। घटनाओं के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। आरोप है कि कुछ लोगों ने अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तीखी बहस और अभद्र व्यवहार किया। मामले के वीडियो और तस्वीरें भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों का कहना है कि पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जरूरी है, लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकारी कर्मियों के साथ अमर्यादित व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि वन विभाग सीमित संसाधनों के बीच लगातार मानव-हाथी संघर्ष को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।

इधर, संविधान में नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों और मौलिक कर्तव्यों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन इसका प्रयोग कानून और सामाजिक मर्यादा के दायरे में होना चाहिए। लोक सेवकों के साथ सहयोग और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी नागरिकों की जिम्मेदारी है।

वन विभाग ने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेज दी है। वहीं जिला प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की है।

- Advertisement -
Ad image
Share This Article