सहारा रिफंड: झारखंड के निवेशकों के साथ ‘सौतेला’ व्यवहार? बिहार और यूपी निकले कोसों आगे, जानें क्या है वजह

झारखंड में सहारा का 'सन्नाटा': आवेदन लाखों में, रिफंड चंद हाथों में!

Johar News Times
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सहारा इंडिया में अपनी गाढ़ी कमाई फंसा चुके निवेशकों के लिए रिफंड प्रक्रिया जारी है, लेकिन ताज़ा आंकड़ों ने झारखंड के निवेशकों को मायूस कर दिया है। CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल की जनवरी 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, रिफंड पाने के मामले में झारखंड अपने पड़ोसी राज्य बिहार और उत्तर प्रदेश से काफी पीछे छूट गया है।

कौन कहाँ खड़ा है?

केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में अब तक ₹8,429.42 करोड़ लौटाए जा चुके हैं। राज्यवार स्थिति कुछ इस प्रकार है:

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राज्यआवेदन की संख्याकुल भुगतान (करोड़ में)
उत्तर प्रदेश35.66 लाख₹2,228.27
बिहार28.00 लाख₹1,892.89
झारखंड13.95 लाख₹847.67
ओडिशा₹707.56

झारखंड में करीब 14 लाख आवेदनों में से अब तक केवल 3.73 लाख आवेदन ही प्रोसेस हो पाए हैं, जो राज्य के निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

झारखंड के पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह: ‘तालाबंदी’

विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि झारखंड में भुगतान की धीमी रफ्तार के पीछे प्रशासनिक और कानूनी उलझनें सबसे बड़ी बाधा हैं:

  • राज्य सरकार के पिछले आदेशों के बाद झारखंड में सहारा के अधिकांश कार्यालय बंद कर दिए गए। इससे निवेशकों को बॉन्ड और दस्तावेजों के सत्यापन में भारी मुश्किल आ रही है।
  • ऑफिस बंद होने के कारण निवेशकों को सदस्यता संख्या और रसीदें प्राप्त करने में दिक्कत हुई, जिससे पोर्टल पर आवेदन रिजेक्ट हो रहे हैं।
  • पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में हुई सख्त कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारियों के कारण सहारा के स्थानीय तंत्र ने काम करना बंद कर दिया, जिसका खामियाजा अब निवेशकों को भुगतना पड़ रहा है।

बिहार और यूपी ने कैसे मारी बाजी?

बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सहारा का जमीनी नेटवर्क और कार्यालय अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय रहे। वहां एजेंटों और कार्यालयों के माध्यम से निवेशकों को दस्तावेजी सहायता मिली, जिससे उनके आवेदन तेजी से प्रोसेस हुए और पैसा सीधे आधार लिंक्ड बैंक खातों में पहुँचा।

निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी

  • आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल mocrefund.crcs.gov.in के माध्यम से ही करें।
  • वर्तमान में सत्यापित दावों पर ₹50,000 तक की राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जा रही है।
  • किसी भी बिचौलिए या एजेंट को रिफंड दिलाने के नाम पर नकद भुगतान न करें।

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