डुमरिया में जर्जर सड़क और ‘नो नेटवर्क’ से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: चुनाव में नेताओं की नो-एंट्री की दी चेतावनी

"सड़क नहीं तो वोट नहीं! डुमरिया के छह गांवों के ग्रामीणों ने नेताओं की एंट्री बैन करने का किया एलान।"

Johar News Times
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डुमरिया : पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत केन्दुआ पंचायत के कई गांवों में बुनियादी सुविधाओं की घोर कंगाली को लेकर ग्रामीणों का धैर्य अब टूट चुका है। जनता दल यूनाइटेड के जिला महासचिव वीरसिंह देवगम के नेतृत्व में बाकीशोल, हतनाबेड़ा, सारुदा और लीपुंगधुटू जंगल ब्लॉक समेत करीब छह गांवों के ग्रामीणों ने जर्जर सड़क के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। इस जनाक्रोश प्रदर्शन में भारी संख्या में स्थानीय महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हुए।

“वोट लेते हैं, फिर भूल जाते हैं नेता” — ग्रामीणों का आरोप

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर क्षेत्र की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया। उनका कहना था कि लगभग 15 किलोमीटर लंबी यह मुख्य सड़क वर्षों से बदहाल और जर्जर स्थिति में है। चुनाव आते ही तमाम नेता गांवों में बड़े-बड़े वादे कर वोट मांग ले जाते हैं, लेकिन जीत दर्ज करने के बाद आज तक किसी ने पलटकर इस सड़क की सुध नहीं ली।

ग्रामीणों ने साफ लफ्जों में कहा है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो आगामी चुनाव में वे सभी दलों के नेताओं का पुरजोर विरोध करेंगे और उन्हें गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा।

बदहाली का दर्द: गांव में एंबुलेंस नहीं आती, बेटियों की शादी तक टूटी!

सारुदा गांव के पूर्व उपमुखिया लखन मुर्मू, ग्राम प्रधान भुकतू मुर्मू सहित लुगु सोरेन, किशुन सोरेन और राजू मुर्मू ने सड़क की बदहाली से रोज होने वाली दिक्कतों को साझा करते हुए बताया:

  • सड़क इस कदर टूटी है कि आपात स्थिति में गांवों के अंदर एंबुलेंस तक नहीं आ पाती। प्रसव पीड़ित महिलाओं और गंभीर मरीजों को मजबूरन साइकिल या मोटरसाइकिल के सहारे जैसे-तैसे डुमरिया अस्पताल पहुंचाना पड़ता है, जिससे कई बार जान पर बन आती है।
  • ग्रामीणों ने एक दर्दनाक हकीकत बयां करते हुए कहा कि सड़क की इस दुर्दशा को देखकर अब बाहरी लोग इन गांवों में अपनी बेटियों की शादी तक करने से कतराने लगे हैं।

नेटवर्क गायब, आपात स्थिति में संपर्क करना भी नामुमकिन

सड़क के साथ-साथ इन छह गांवों के लोग डिजिटल युग में भी संचार व्यवस्था के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में बीएसएनएल का टावर काफी दूर होने के कारण मोबाइल नेटवर्क न के बराबर रहता है। किसी मरीज की तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क साधना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

डीसी दराज तक पहुंचेगी आवाज, उग्र आंदोलन की तैयारी

जदयू के जिला महासचिव वीर सिंह देवगम ने ग्रामीणों की जायज मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि इस बदहाली को और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि बेहद जल्द डुमरिया प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के माध्यम से पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को एक मांगपत्र सौंपा जाएगा। इसके बावजूद अगर प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया, तो सभी छह गांवों के सैकड़ों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचकर सीधे तौर पर उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से रामदास मुर्मू, चंद्रो सोरेन, सारू सबर, सिमल मुर्मू, पान सुरु मुर्मू, रनिंग मुर्मू, गौवरा मुर्मू और नोहा हांसदा समेत सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।

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