जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर में इस साल रामनवमी का उल्लास सिर्फ परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ‘नारी शक्ति’ के एक नए अध्याय का गवाह बना। जहां हर साल शहर भगवामय होता है, वहीं इस बार फिजां में गूंजते ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच महिलाओं के अदम्य साहस ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है।
1. रूढ़ियों को तोड़ती ढोल की थाप
इस बार के जुलूस की सबसे खास तस्वीर रही महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी। भारी-भरकम ढोल गले में लटकाए, पूरी ऊर्जा के साथ उन्हें बजाती महिलाएं यह संदेश दे रही थीं कि भक्ति और शक्ति के इस पर्व में वे किसी से पीछे नहीं हैं।
2. लाठी, तलवार और अदम्य साहस
सड़कों पर जब युवतियों का समूह उतरा, तो नजारा देखने लायक था:
- हवाई करतब: एक युवती के कंधे पर संतुलन बनाती दूसरी युवती और बिजली की गति से घूमती लाठियां महज प्रदर्शन नहीं, बल्कि वर्षों की सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग का प्रमाण थीं।
- तलवारबाजी: हाथों में नंगी तलवारें लेकर जब महिलाएं ‘झांसी की रानी’ के रूप में उतरीं, तो उनकी आंखों की चमक और तलवारों की खनक ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
- मॉक फाइट: दो महिलाओं के बीच लाठी और ढाल का मुकाबला किसी मंजे हुए योद्धा जैसा था, जो उनके कड़े अभ्यास को दर्शाता है।
3. आस्था और कला का संगम
जुलूस में केवल शौर्य ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के कोमल पक्ष भी दिखे:
- डांडिया और समूह नृत्य: पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने ताल से ताल मिलाकर उत्सव को और भी रंगीन बना दिया।
- जीवंत झांकियां: मां काली का रौद्र रूप और भगवान शिव का शांत स्वरूप—नारी शक्ति और पुरुष तत्व के संतुलन की एक भावुक कर देने वाली प्रस्तुति थी।
4. देशभक्ति का जज्बा
भक्ति के इस महासंगम में शहीद जवानों की कुर्बानी और आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई को झांकियों के माध्यम से दिखाया गया। सेना के जांबाजों द्वारा दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने वाले दृश्यों ने लोगों के भीतर राष्ट्र प्रेम का ज्वार भर दिया।
5. प्रशासन की मुस्तैदी
इतने विशाल आयोजन को शांतिपूर्ण संपन्न कराने में जमशेदपुर जिला प्रशासन और पुलिस की भूमिका सराहनीय रही। ड्रोन और CCTV कैमरों की पैनी नजर और हर चौक-चौराहों पर तैनात सुरक्षाबल ने यह सुनिश्चित किया कि शौर्य का यह प्रदर्शन सुरक्षित तरीके से संपन्न हो।
निष्कर्ष: जमशेदपुर की इस ऐतिहासिक रामनवमी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नारी अब अबला नहीं है। 8 साल की बच्ची से लेकर 60 साल की बुजुर्ग महिला तक, हर किसी ने यह साबित कर दिया कि वे भक्ति से लेकर शक्ति तक, हर मोर्चे पर नेतृत्व करने में सक्षम हैं। यह सिर्फ एक जुलूस नहीं, बल्कि बदलते भारत की एक सशक्त तस्वीर है।










