पश्चिम बंगाल में टीएमसी में बगावत के संकेत? निलंबित विधायकों ने 59 सदस्यों के समर्थन का किया दावा

पश्चिम बंगाल में टीएमसी में बगावत के संकेत? निलंबित विधायकों ने 59 सदस्यों के समर्थन का किया दावा

Johar News Times
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कोलकाता, पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निलंबित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा विधानसभा पहुंचे और 59 विधायकों के समर्थन का दावा किया। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर संभावित बगावत और बड़े राजनीतिक फेरबदल की अटकलों को हवा दे दी है। टीएमसी ने हाल ही में दोनों विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किया था। इसके बाद दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि 6 मई को नेता प्रतिपक्ष, उपनेता प्रतिपक्ष और चीफ व्हिप के चयन से जुड़े प्रस्ताव पत्र पर कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए थे। उनका दावा है कि उनके हस्ताक्षर भी जाली बनाए गए।

विधानसभा पहुंचे बागी विधायक
निलंबन के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में कई टीएमसी विधायकों से मुलाकात करते देखा गया था। अब विधानसभा पहुंचकर उन्होंने 59 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। सूत्रों के अनुसार, बागी गुट ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नया नेता प्रतिपक्ष बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

शीर्ष नेतृत्व पर साधा निशाना
ऋतब्रत बनर्जी पहले भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी को उसके मूल नेतृत्व से दूर कर दिया गया है और निर्णय प्रक्रिया कुछ लोगों तक सीमित हो गई है। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।

सियासी गणित पर नजर

हालिया विधानसभा चुनाव में टीएमसी को 294 सदस्यीय सदन में 80 सीटें मिली थीं। ऐसे में यदि 59 विधायकों के समर्थन का दावा सही साबित होता है, तो राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में वैध विभाजन के लिए दो-तिहाई विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है, जो 80 विधायकों के मामले में 54 का आंकड़ा बनता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी गुट के दावे में सच्चाई है, तो विधानसभा में विपक्ष की स्थिति और टीएमसी की संगठनात्मक मजबूती दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है। हालांकि, अभी तक टीएमसी नेतृत्व की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सभी की नजरें आने वाले दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं।

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