पलामू जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों के लिए यह एक निराशाजनक खबर है। जिले में स्कूली बच्चों की पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा मद के लिए आवंटित करीब 75 लाख रुपये की राशि खर्च नहीं हो सकी, जिसे वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद विभाग को सरेंडर करना पड़ा है।
पलामू के हजारों बच्चों पर पड़ा असर
इस राशि के वापस जाने से पलामू जिले के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के हजारों छात्र-छात्राएं सरकार की इस कल्याणकारी योजना के लाभ से वंचित रह गए।
- लापरवाही का आलम: नियम के अनुसार यह राशि वित्तीय वर्ष के भीतर ही बच्चों के खातों या सामग्री वितरण में उपयोग हो जानी चाहिए थी।
- अधिकारियों की सुस्ती: विभाग और स्कूल प्रबंधन समितियों की धीमी कार्यशैली के कारण खरीदारी और वितरण की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की जा सकी।
ठंड में ठिठुरते रहे बच्चे, वापस गया बजट
पलामू में इस बार कड़ाके की ठंड पड़ी थी, जिसके बावजूद जिले के पास बजट होने के बावजूद बच्चों को समय पर स्वेटर और जूते नहीं मिल सके।
- अभिभावकों का आक्रोश: स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार ने बजट उपलब्ध कराया था, तो विभाग की लापरवाही के कारण बच्चों को पुरानी ड्रेस या फटे जूतों में स्कूल जाना पड़ा।
- शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: यह मामला पलामू जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर क्यों राशि का उपयोग सही समय पर नहीं किया गया।
क्या कहते हैं अधिकारी?
पलामू के शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि कुछ तकनीकी दिक्कतों और डाटा एंट्री में हुई देरी की वजह से यह स्थिति पैदा हुई। हालांकि, अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि आने वाले सत्र में ऐसी गलती नहीं होगी और बच्चों को समय पर सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
निष्कर्ष: पलामू जिले की यह घटना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय की कमी का एक बड़ा उदाहरण है, जिसका खामियाजा गरीब तबके के स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ा है।










