झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में हुए बहुचर्चित पेपर लीक और सॉल्वर गिरोह मामले में बुधवार को रांची के सिविल कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अपर न्यायायुक्त योगेश की अदालत ने गिरफ्तार किए गए 166 आरोपियों की जमानत याचिका पर बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 11 अप्रैल 2026 का है, जब रांची पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर तमाड़ के रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित भवन में छापेमारी की थी। पुलिस ने मौके से 166 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इनमें 5 मुख्य सरगना, 152 पुरुष अभ्यर्थी और 7 महिला अभ्यर्थी शामिल थीं।
10 लाख में सौदा और मोबाइल जब्त
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गिरोह के एजेंटों ने अभ्यर्थियों को एक सुनसान जगह पर इकट्ठा किया था। वहाँ उनके मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड जमा करा लिए गए थे और उन्हें संभावित प्रश्नों के उत्तर रटवाए जा रहे थे।
- प्रत्येक अभ्यर्थी से परीक्षा पास कराने के बदले 10 लाख रुपये का सौदा हुआ था।
- पुलिस ने मौके से कई बैंक चेक और दस्तावेज भी बरामद किए थे।
पेपर लीक नहीं, बल्कि ठगी
हैरानी की बात यह है कि छापेमारी और इतनी बड़ी गिरफ्तारी के बाद रांची पुलिस और JSSC ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह दावा किया था कि परीक्षा का असली पेपर लीक नहीं हुआ था। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने फर्जी प्रश्न पत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी करने की योजना बनाई थी। हालांकि, पुलिस ने इस अंतरराज्यीय गिरोह के पांच मुख्य सरगनाओं—अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद—को जेल भेज दिया था।
अदालत के फैसले पर टिकी निगाहें
तमाड़ थाना में दर्ज कांड संख्या 21/2026 के तहत इन सभी को 13 अप्रैल को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। पिछले कई हफ्तों से जेल में बंद इन आरोपियों के भविष्य और जमानत पर अब अदालत का फैसला निर्णायक होगा।










