रांची, झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) ने दावा किया है कि संताल परगना के चार जिलों- दुमका, गोड्डा, जामताड़ा और देवघर के स्टॉकयार्ड में कुल 13.30 लाख सीएफटी से अधिक बालू उपलब्ध है। इसी स्टॉक की नीलामी के लिए निगम ने 19 मई को निविदा जारी की है, जबकि 5 जून को रांची स्थित मुख्यालय में नीलामी तय की गई है। दावे के अनुसार दुमका में चार, गोड्डा में एक, जामताड़ा में तीन और देवघर में पांच स्टॉकयार्ड में बालू जमा बताया गया है। लेकिन ‘प्रभात खबर’ की फील्ड पड़ताल में कई जगह स्थिति इसके उलट पाई गई।
देवघर जिले के सारठ थाना क्षेत्र के रानीगंज मौजा में जहां 2,05,400 सीएफटी बालू होने का दावा किया गया था, वहां मौके पर करीब 2000 सीएफटी ही बालू मिला। वहीं मरगोमुंडा अंचल के पांडया स्थित स्टॉकयार्ड में 18,750 सीएफटी बालू होने के दावे के विपरीत केवल खाली मैदान मिला। इसी तरह करौं अंचल के सरभंगा में 2,90,850 सीएफटी बालू का उल्लेख किया गया था, जबकि मौके पर नाममात्र बालू ही पाया गया। देवघर जिले के ही बसंतपुर मौजा स्थित राधे मोहदार क्षेत्र में 27,112.500 सीएफटी बालू का दावा था, लेकिन वहां अधिकतर स्थान पर झाड़ियां और खाली भूमि ही दिखाई दी।
इन विसंगतियों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब कई स्टॉकयार्ड में बालू मौजूद ही नहीं है, तो 13.30 लाख सीएफटी स्टॉक का दावा और उसकी नीलामी प्रक्रिया कैसे तय की गई। साथ ही रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में अंतर को लेकर भी चर्चा तेज है। वहीं जेएसएमडीसी की ओर से कहा गया है कि अगस्त 2025 तक बालू घाटों के संचालन के बाद जो स्टॉक बचा है, उसी के आधार पर निविदा निकाली गई है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि कुछ जगहों पर बालू बारिश या प्राकृतिक कारणों से कम हो सकता है और जहां जो उपलब्ध है, उसी आधार पर नीलामी प्रक्रिया की जा रही है।
