रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा बैकलॉग नियुक्तियों में उम्र सीमा की कट-ऑफ डेट निर्धारित किए जाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। झारखंड हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर अभ्यर्थियों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और आयोग से जवाब तलब किया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई। अदालत ने प्रार्थियों के पक्ष को सुनने के बाद माना कि विज्ञापन में उम्र सीमा की कट-ऑफ डेट तय करने से कई योग्य अभ्यर्थी इस अवसर से वंचित हो रहे हैं, जो एक गंभीर विषय है।
- निर्देश: अदालत ने राज्य सरकार और जेपीएससी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई से पहले अपना पक्ष रखते हुए प्रतिशपथ पत्र (Counter Affidavit) दाखिल करें।
- अगली तिथि: मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई के लिए 21 अप्रैल 2026 की तारीख मुकर्रर की गई है।
क्या है विवाद की जड़?
जेपीएससी द्वारा निकाली गई बैकलॉग नियुक्तियों के विज्ञापन में उम्र की गणना के लिए जो ‘कट-ऑफ डेट’ तय की गई है, उसे लेकर अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है।
- अवसर का अभाव: अभ्यर्थियों का तर्क है कि बैकलॉग नियुक्तियां देरी से निकाली गई हैं, ऐसे में उम्र सीमा में उचित छूट (Relaxation) मिलनी चाहिए थी।
- विज्ञापन की शर्तें: याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान शर्तों के कारण उन अभ्यर्थियों का करियर दांव पर है, जो वर्षों से इन नियुक्तियों का इंतजार कर रहे थे।
आगे क्या?
21 अप्रैल को होने वाली सुनवाई काफी निर्णायक हो सकती है। यदि सरकार और आयोग का जवाब अदालत को संतुष्ट नहीं कर पाता है, तो विज्ञापन की शर्तों में बदलाव या नियुक्ति प्रक्रिया पर स्थगन जैसे आदेशों की संभावना बनी रहेगी। फिलहाल, हजारों अभ्यर्थी न्याय की उम्मीद में हाईकोर्ट की ओर देख रहे हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, रांची।










