झारखंड में बालू संकट बरकरार, 17 घाटों की लीज फाइनल फिर भी खनन शुरू नहीं

झारखंड में बालू संकट बरकरार, 17 घाटों की लीज फाइनल फिर भी खनन शुरू नहीं

Johar News Times
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झारखंड में फिलहाल सस्ता बालू मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है। एनजीटी की रोक लागू होने में अब सिर्फ 14 दिन बचे हैं, लेकिन बालू स्टॉक के लिए फाइनल किए गए 17 घाटों को अब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कंसेट टू ऑपरेट (सीटीओ) नहीं मिला है। सीटीओ के बिना बालू खनन शुरू नहीं हो सकता, जिससे सरकार की तैयारी अधर में लटक गई है।

राज्य सरकार ने 10 जून से पहले करीब दो करोड़ सीएफटी बालू का स्टॉक करने के उद्देश्य से जल्दबाजी में घाटों की लीज डीड फाइनल की थी। हालांकि फाइलें अभी भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में लंबित हैं। बोर्ड अध्यक्ष राजीव लोचन बक्शी ने कहा कि उनके स्तर पर कोई सीटीओ लंबित नहीं है और आवेदन के 120 दिनों के भीतर अनुमति जारी करने का प्रावधान है। इधर राज्यभर में बालू संकट जारी है और अवैध खनन खुलेआम हो रहा है। कोडरमा के मरकच्चो प्रखंड स्थित सकरी नदी से प्रतिदिन करीब 100 ट्रैक्टरों से अवैध बालू उठाव किया जा रहा है, जबकि घाट का टेंडर तक नहीं हुआ है। जिला टास्क फोर्स होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।

बालू खनन की प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत पहले जिला प्रशासन बालू घाटों का टेंडर करता है। इसके बाद पर्यावरण स्वीकृति, पेसा कानून के तहत ग्रामसभा की अनुमति, माइनिंग प्लान, लीज डीड और अंत में सीटीओ लेना जरूरी होता है। इसके बाद ही वैध खनन शुरू हो सकता है।

राज्य में कैटेगरी-2 के कुल 444 बालू घाट हैं। इनमें से 299 घाटों का टेंडर हुआ है, जबकि सिर्फ 35 घाटों को पर्यावरण मंजूरी मिली है। अब तक केवल 17 घाटों की लीज फाइनल हो पाई है।

ग्रामसभा में देरी से अटका टेंडर
शेड्यूल एरिया में ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य होने के कारण कई जिलों में तीन महीने तक बैठक नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने 15 जनवरी को नीलामी पर लगी रोक हटाई थी, लेकिन प्रशासनिक देरी से 199 घाटों का टेंडर नहीं हो पाया।

पुराने चालान पर हो रहा अवैध कारोबार
जमशेदपुर में नया गड़बड़झाला सामने आया है। यहां झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जेएसएमडीसी) के 15 अगस्त 2025 से पहले जारी चालानों का इस्तेमाल कर अब भी अवैध बालू कारोबार किया जा रहा है। जबकि जेएसएमडीसी की गतिविधियां पिछले नौ महीने से बंद हैं। तस्कर पश्चिम बंगाल और गुमला के चालानों का इस्तेमाल कर बालू ढुलाई कर रहे हैं।

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