झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट: 6 अप्रैल से जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

Johar News Times
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जमशेदपुर/रांची: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर बड़े संकट की ओर बढ़ रही है। राज्य भर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों (JDA) ने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की अपनी लंबित मांग को लेकर 6 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अंतिम फैसला ले लिया है। डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले पांच वर्षों से अपनी मांगों को लेकर सरकार के दरवाजे खटखटा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल “आश्वासन” ही मिला है।

मुख्य मांगें और विरोध का कारण

  • कम स्टाइपेंड: डॉक्टरों का तर्क है कि झारखंड में मिलने वाला स्टाइपेंड पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी कम है। पिछले 5 वर्षों में इसमें कोई सम्मानजनक वृद्धि नहीं हुई है।
  • लगातार अनदेखी: डॉक्टरों ने बताया कि वे स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव (ACS) और मुख्यमंत्री तक अपनी लिखित शिकायतें और मांगें पहुंचा चुके हैं, लेकिन कैबिनेट में फाइल बढ़ने का भरोसा देकर हर बार मामला टाल दिया जाता है।
  • शांतिपूर्ण विरोध: पिछले चार-पांच हफ्तों से डॉक्टर हर सोमवार को काला बिल्ला (Black Badge) लगाकर ड्यूटी कर रहे थे, ताकि सरकार का ध्यान खींचा जा सके।

मरीजों पर पड़ेगा भारी असर

हड़ताल का सबसे ज्यादा असर कोल्हान के सबसे बड़े अस्पताल जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज और रांची के रिम्स (RIMS) सहित अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर पड़ेगा।

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  • मरीजों की संख्या: अकेले MGM अस्पताल में प्रतिदिन 400 से 500 मरीज जूनियर डॉक्टरों के भरोसे रहते हैं। ओपीडी (OPD) सेवाओं में यह संख्या 1000 से 1500 तक पहुंच जाती है।
  • सेवाएं होंगी बाधित: डॉक्टरों ने साफ किया है कि इस बार आंदोलन उग्र होगा। हालांकि, मानवीय आधार पर आपातकालीन (Emergency) सेवाओं को फिलहाल बाधित न करने की बात कही गई है, लेकिन ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रह सकती हैं।

आंदोलन को मिला बड़ा समर्थन

इस बार जूनियर डॉक्टरों का यह आंदोलन काफी मजबूत नजर आ रहा है क्योंकि इसे राज्य के बड़े चिकित्सा संगठनों का समर्थन प्राप्त है:

  1. IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन)
  2. JHAASA (झारखंड स्वास्थ्य सेवा संघ)
  3. FAIMA (फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन)

सरकार की सक्रियता और कल की बैठक

हड़ताल की चेतावनी और चौतरफा दबाव के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉक्टरों से बातचीत की पहल की है। जानकारी के अनुसार, कल दोपहर 3:00 बजे रांची स्थित नेपाल हाउस में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) ने डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल को बैठक के लिए बुलाया है।

डॉक्टरों का रुख: “हमें अब और आश्वासन नहीं, ठोस निर्णय चाहिए। अगर 6 अप्रैल से पहले स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया, तो राज्य के करीब 800 जूनियर डॉक्टर, इंटर्न्स और सीनियर रेजिडेंट्स काम का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।”

अब सबकी नजरें कल होने वाली हाई-लेवल मीटिंग पर टिकी हैं। क्या सरकार हड़ताल टालने में सफल होगी या मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा?

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