झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य पुलिस विभाग में दारोगा से इंस्पेक्टर पद पर होने वाली प्रोन्नति प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने इस मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट के इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि बड़ी संख्या में अवर निरीक्षक (दारोगा) प्रमोशन की प्रतीक्षा में थे।
क्या है पूरा विवाद?
मामला वर्ष 2017 में हुई दारोगा बहाली और उससे जुड़ी वरीयता सूची (सीनियरिटी लिस्ट) से संबंधित है। अदालत को बताया गया कि उस समय दारोगा भर्ती के लिए दो अलग-अलग विज्ञापन जारी किए गए थे।
- विज्ञापन संख्या 05/2017 के तहत सीधी भर्ती (डायरेक्ट रिक्रूटमेंट) से नियुक्तियां हुई थीं।
- जबकि विज्ञापन संख्या 09/2017 के माध्यम से सीमित प्रतियोगिता परीक्षा (लिमिटेड एग्जामिनेशन) के जरिए दारोगाओं की बहाली की गई थी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सीधी भर्ती वाले दारोगाओं का विज्ञापन पहले जारी हुआ था और उनकी नियुक्ति प्रक्रिया भी पहले पूरी हुई थी। इसके बावजूद विभाग ने वरीयता सूची तैयार करते समय लिमिटेड बैच के अधिकारियों को उनसे ऊपर स्थान दे दिया।
नियमों की अनदेखी का आरोप
प्रार्थी उत्तम तिवारी एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि विभाग ने नियमों की अनदेखी कर जूनियर अधिकारियों को सीनियर बना दिया। इसी निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि वरीयता निर्धारण की प्रक्रिया में प्रथम दृष्टया विसंगतियां दिखाई दे रही हैं। इसके बाद कोर्ट ने अगला आदेश आने तक दारोगा से इंस्पेक्टर पद पर होने वाली सभी पदोन्नतियों पर रोक लगा दी।
21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक सीनियरिटी विवाद का समाधान नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार की प्रमोशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 21 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की गई है। इस दौरान राज्य सरकार और पुलिस विभाग को अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है।
कई अधिकारियों की प्रोन्नति अटकी
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद उन पुलिस अधिकारियों की प्रोन्नति फिलहाल रुक गई है, जिनका नाम हाल ही में जारी वरीयता सूची में शामिल था। अब विभाग को अदालत में यह साबित करना होगा कि सीनियरिटी तय करने का आधार क्या था और किस नियम के तहत सूची तैयार की गई। राज्यभर के पुलिसकर्मियों की नजर अब 21 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां 2017 बैच के दारोगाओं के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।
