झारखंड। राज्य की जेल व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए लागू किए गए “झारखंड जेल मैनुअल 2025” को मानवीय और प्रगतिशील पहल के रूप में देखा जा रहा है। झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन के प्रमुख मनोज मिश्रा ने इस मैनुअल का स्वागत करते हुए कहा कि अब कैदियों को बेड़ियों, अनावश्यक हथकड़ी और अत्याचार का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मानगो के अविनाश नगर में आयोजित जेएचआरसी की बैठक में उन्होंने कहा कि यह मैनुअल सरकार की संवेदनशील और सुधारवादी सोच का परिणाम है, जो कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा के साथ-साथ उनके सम्मानजनक पुनर्वास पर केंद्रित है।
नए मैनुअल के तहत जेलों में बेड़ियां पहनाने, अनावश्यक हथकड़ी लगाने और शारीरिक दंड देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके स्थान पर कैदियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वच्छ भोजन और रहने की मानक व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। साथ ही महिला, बुजुर्ग और दिव्यांग कैदियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जेलों में सीसीटीवी निगरानी और मजबूत शिकायत निवारण तंत्र को लागू किया गया है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
मनोज मिश्रा ने बताया कि इस मैनुअल में शिक्षा और कौशल विकास को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य कैदियों को सजा के बाद समाज की मुख्यधारा में जोड़ना है, ताकि वे रिहाई के बाद आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नीतियों की सफलता उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, और जेएचआरसी इस पर लगातार नजर रखेगा।
बैठक में संगठन के कई सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने मानवाधिकारों की रक्षा और जेल सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।










