जमशेदपुर: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम इतिहास और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ‘आज़ाद हिंद फौज’ के अदम्य साहस को याद करते हुए जमशेदपुर के मिलानी हॉल में ‘मोइरांग विजय दिवस’ का गरिमामय आयोजन किया गया।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शेखर डे (श्रीलेदर्स) एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व कमिश्नर विजय कुमार सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और अपने संबोधन में नेताजी के विजन तथा आज़ाद हिंद फौज के बलिदानों को आधुनिक भारत की नींव बताया।
मोइरांग विजय: जब पहली बार लहराया आज़ादी का ध्वज
14 अप्रैल 1944 के उस ऐतिहासिक दिन की याद में वक्ताओं ने गौरवशाली इतिहास को साझा किया। कर्नल शौकत अली मलिक ने नेताजी के निर्देश पर मणिपुर के मोइरांग में पहली बार आज़ाद हिंद सरकार का ध्वज फहराया था। यह वह क्षण था जब भारतीय सैनिकों ने अपनी धरती पर ब्रिटिश हुकूमत को पराजित कर विजय पताका फहराई थी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीवंत हुआ संघर्ष
- उद्घाटन गीत: कार्यक्रम की शुरुआत ‘मिलनी सुर संगम’ के उद्घाटन गीत से हुई, जिसका निर्देशन चेताली दास ने किया।
- नृत्य प्रस्तुति: डीपीएस इंटरनेशनल और गुरुकुल के विद्यार्थियों ने मिस्तु मुखर्जी की कोरियोग्राफी में शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं भारत सेवाश्रम स्कूल के छात्रों ने भी देशप्रेम से ओतप्रोत प्रस्तुति दी।
- कविता और गाथा: प्रतिलेखा राय ने मोइरांग विजय की शौर्यगाथा सुनाई, जबकि मंजरी संस्था के सदस्यों ने कविता कोलाज के माध्यम से वीरों के संघर्ष को जीवंत किया।
गणमान्य जनों की मौजूदगी
इस ऐतिहासिक स्मृति उत्सव में बंगाल क्लब के अध्यक्ष तापस मित्रा, महासचिव सौम्य सेन, सुष्मिता सोम खान, अल्पना भट्टाचार्जी सहित शहर के कई प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
मोइरांग विजय दिवस का यह आयोजन देशभक्ति और साहस की वह मिसाल है जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
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