दिखावे की फिटनेस पड़ रही भारी: बाहर से तंदुरुस्त दिखने वाले लोगों को क्यों आ रहा है हार्ट अटैक? जानें विशेषज्ञों की राय

Johar News Times
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आज के दौर में सेहत को लेकर एक बहुत बड़ा भ्रम फैला हुआ है। हम अक्सर ऐसे लोगों के बारे में सुनते हैं जो नियमित रूप से जिम जाते थे, सही डाइट लेते थे और पूरी तरह सक्रिय रहते थे, लेकिन अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। यह स्थिति समाज में एक डर और चिंता पैदा कर रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिसे हम फिटनेस समझ रहे हैं, वह दरअसल केवल बाहरी दिखावट है। दिल की असली सेहत शरीर के भीतर छिपे उन कारकों पर निर्भर करती है जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

एथलेटिक बॉडी और स्वस्थ दिल के बीच का अंतर

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि वजन कम होना या मांसपेशियों का सुडौल होना ही पूर्ण स्वास्थ्य की निशानी है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, बाहरी फिटनेस और हृदय की आंतरिक मजबूती दो अलग चीजें हैं। कोई व्यक्ति मैराथन दौड़ सकता है या जिम में भारी वजन उठा सकता है, फिर भी उसकी धमनियों में रुकावट या सूजन हो सकती है। शरीर के अंदर होने वाली सूक्ष्म क्षति या खून का थक्का जमने जैसी प्रक्रियाएं बाहर से दिखाई नहीं देतीं। यही कारण है कि जिसे दुनिया फिट मानती है, उसका दिल अंदर से संघर्ष कर रहा होता है।

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भारत में बदलती तस्वीर: युवाओं पर मंडराता खतरा

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर के नवीनतम आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में दिल की बीमारियों के आधे से ज्यादा मामले सत्तर साल से कम उम्र के लोगों में दर्ज किए जा रहे हैं। अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है। कम उम्र में हार्ट अटैक आने की मुख्य वजह यह है कि युवा बाहरी तौर पर तो खुद को फिट रखते हैं, लेकिन अंदरूनी स्वास्थ्य की जांच को गंभीरता से नहीं लेते।

वे मुख्य कारण जो बन रहे हैं ‘साइलेंट किलर’

  • वंशानुगत जोखिम और जेनेटिक्स: अगर आपके परिवार में माता-पिता या किसी करीबी रिश्तेदार को कम उम्र में दिल से जुड़ी परेशानी रही है, तो आपका जोखिम स्वतः ही बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में केवल खान-पान और व्यायाम पूरी सुरक्षा नहीं दे पाते।
  • तनाव और नींद का असंतुलन: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक दबाव सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है। काम की डेडलाइन और नींद की कमी से शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को प्रभावित करता है।
  • अनदेखी बीमारियां: हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल ऐसी समस्याएं हैं जो शरीर में चुपचाप बनी रहती हैं। जब तक इनका परीक्षण न कराया जाए, इनका पता नहीं चलता और यह अचानक बड़े खतरे के रूप में सामने आती हैं।
  • पर्यावरण और प्रदूषण: बढ़ता वायु प्रदूषण भी धमनियों में सूजन पैदा करता है, जिससे दिल के दौरे का खतरा उन लोगों में भी बढ़ जाता है जो स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं।

सुरक्षा के लिए क्या अपनाएं?

विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ पसीना बहाना काफी नहीं है। आपको अपने शरीर के साथ संवाद करना होगा। तीस साल की उम्र पार करने के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार अपनी लिपिड प्रोफाइल, शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर की गहराई से जांच करानी चाहिए। अगर शरीर में असामान्य थकान, सांस फूलना या सीने में भारीपन महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।

फिटनेस का मतलब सिर्फ एक अच्छा शरीर नहीं, बल्कि एक स्वस्थ हृदय है। याद रखें कि आपका दिल तभी सुरक्षित है जब आप उसे बाहर से चमकाने के साथ-साथ अंदर से भी स्वस्थ रखने के लिए नियमित डॉक्टरी जांच का सहारा लेंगे।

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