झारखंड के रामगढ़ जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। यहाँ अवैध कोयला खनन के चक्कर में चार युवकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। घटना सीसीएल अरगड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुजू ओपी क्षेत्र के काजू बगान जंगल की है। यहाँ एक बंद भूमिगत खदान के समीप अवैध रूप से बनाए गए एक गहरे गड्ढे में कोयला निकालने उतरे चार युवकों की ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई।
काफी देर तक बाहर नहीं आए, तो मचा हड़कंप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चारों युवक कोयला निकालने के इरादे से उस अवैध सुरुंगनुमा गड्ढे के भीतर दाखिल हुए थे। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी वे बाहर नहीं निकले, तो बाहर खड़े लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना सीसीएल प्रबंधन और स्थानीय पुलिस को दी।
CCL की रेस्क्यू टीम ने निकाले शव, मृतकों की हुई पहचान
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए सीसीएल की एक्सपर्ट माइंस रेस्क्यू टीम और मेडिकल स्टाफ तुरंत मौके पर पहुंचे। भारी मशक्कत के बाद रेस्क्यू टीम ने खदान के भीतर से चारों युवकों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान स्थानीय युवकों के रूप में हुई है, जिनके नाम इस प्रकार हैं:
- किशोर
- आशीष
- देवा
- डब्लू
विशेषज्ञों का दावा: मिथेन और जहरीली गैसों का था साम्राज्य
रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल विशेषज्ञों और अधिकारियों ने बताया कि बंद पड़ी भूमिगत खदानों के भीतर ऑक्सीजन का स्तर लगभग शून्य या बेहद कम होता है। इसके अलावा वहाँ मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी खतरनाक विषैली गैसें जमा हो जाती हैं। जैसे ही ये युवक अंदर गए, ऑक्सीजन की भारी कमी और इन गैसों के प्रभाव के कारण पल भर में उनका दम घुट गया और वे बेहोश होकर काल के गाल में समा गए।
सुरक्षा व्यवस्था और अवैध खनन पर उठे गंभीर सवाल
इस दिल दहला देने वाले हादसे के बाद रामगढ़ थाना और कुजू ओपी की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद से पीड़ितों के घरों में चीख-पुकार मची है और पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
यह हादसा एक बार फिर बंद खदानों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध कोयला खनन और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन से मांग की है कि ऐसे सभी अवैध मुहानों को तुरंत वैज्ञानिक तरीके से डोजरिंग कर बंद किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और मां की गोद सूनी न हो।
