कोरोना और बर्ड फ्लू के बाद अब हंतावायरस (Hantavirus) ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे एक एक्सपीडिशन क्रूज शिप, MV Hondius पर इस वायरस के संदिग्ध प्रकोप से 3 लोगों की मौत हो गई है। यह जहाज अर्जेंटीना से केप वर्डे की ओर जा रहा था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्वास्थ्य अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि बीच समुद्र में एक जहाज पर यह वायरस कैसे पहुंचा।
फेफड़ों को सीधा निशाना बनाता है यह वायरस
जर्नल Frontiers in Microbiology के अनुसार, हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों और चमगादड़ों में पाया जाता है। इंसानों में यह तब फैलता है जब वे चूहों के मल, पेशाब या लार के संपर्क में आते हैं। यह वायरस दो तरह से हमला करता है:
- HPS (पल्मोनरी सिंड्रोम): इसमें फेफड़ों में पानी भर जाता है और सांस लेना नामुमकिन हो जाता है।
- HFRS (हेमरेजिक फीवर): यह किडनी को पूरी तरह फेल कर सकता है।

कितना खतरनाक है हंतावायरस?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक ‘साइलेंट किलर’ है। इसकी मृत्यु दर 40% तक है, जो इसे बेहद घातक बनाती है।
- इंसान से इंसान में संक्रमण: राहत की बात यह है कि यह कोविड-19 की तरह एक इंसान से दूसरे इंसान में आसानी से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित वातावरण (जैसे चूहों वाली जगह) में सांस लेने से यह तुरंत शरीर में प्रवेश कर जाता है।
शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
हंतावायरस के लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इसे पहचानने में गलती कर देते हैं:
- शुरुआती संकेत: तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और थकान।
- गंभीर संकेत: अचानक सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होना और लो ब्लड प्रेशर।
वायरस के संपर्क में आने के 1 से 8 हफ्ते बाद कभी भी लक्षण दिख सकते हैं।
इलाज और बचाव ही एकमात्र रास्ता
फिलहाल हंतावायरस का कोई खास ‘एंटीवायरल’ इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
- इलाज: मरीज को तुरंत ICU में भर्ती कर ‘सपोर्टिव केयर’ और ऑक्सीजन दी जाती है।
- बचाव: अपने घर और कार्यस्थल पर चूहों को न पनपने दें। सफाई करते समय मास्क पहनें और खाने-पीने की चीजों को ढककर रखें।
अधिकारियों का मानना है कि क्रूज शिप पर यह संक्रमण या तो जहाज पर मौजूद चूहों की वजह से फैला है या फिर यात्री बोर्डिंग से पहले ही संक्रमित हो चुके थे। फिलहाल जहाज पर कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए हैं।










