सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत गेंगेरदा गांव में सड़क नहीं होने के कारण एक 55 वर्षीय बीमार महिला, बाजार देवी को ग्रामीणों ने खटिया पर लादकर दो किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। यह घटना राज्य में ग्रामीण सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति को दर्शाती है। वर्षों से मांग के बावजूद गांव तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है।
खटिया बनी एंबुलेंस, 2 किलोमीटर का पैदल सफर
जानकारी के अनुसार, गेंगेरदा निवासी बाजार देवी (55 वर्ष) पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं। अचानक उनकी स्थिति गंभीर हो गई। गांव तक कोई पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस या अन्य वाहन का पहुंचना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में परिजनों और ग्रामीणों ने खटिया को ही ‘डोली’ बनाया और महिला को उस पर लिटाकर उबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए करीब दो किलोमीटर पैदल चले।
मुख्य सड़क तक पहुंचने की जद्दोजहद
ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद मरीज को मुख्य सड़क मातकोमटोड़ा तक पहुंचाया। वहां से एक निजी वाहन की व्यवस्था की गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल ले जाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब पैदल चलना भी दूभर हो जाता है।
नेताओं के आश्वासन और ग्रामीणों का आक्रोश
गेंगेरदा गांव के लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। सड़क के अभाव में कई बार गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका है, जिससे कई लोगों की जान पर बन आती है।
यह घटना एक बार फिर सरकार के “गांव-गांव तक सड़क” के दावों पर सवाल खड़े करती है और ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को उजागर करती है।








