पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी स्थित सुरदा माइंस में पिछले 17 जून से जारी आर्थिक नाकेबंदी और गतिरोध के कारण हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। आंदोलन के चलते माइंस के ‘फोर्थ शाफ्ट गेट’ से कॉपर अयस्क का परिवहन पूरी तरह ठप हो गया है। इस चक्काजाम और अवरोध के कारण माइनिंग का काम संभाल रही ठेका कंपनी आर.के. अर्थ प्राइवेट लिमिटेड को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जिससे क्षेत्र के औद्योगिक गलियारे में चिंता की लहर है।
रोजाना 20 लाख का फटका, 1 करोड़ से ऊपर पहुंचा नुकसान
कंपनी सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सुरदा माइंस के फोर्थ शाफ्ट से सामान्य दिनों में प्रतिदिन 450 से 500 टन अयस्क की ढुलाई की जाती थी। लेकिन 17 जून से जारी नाकेबंदी के कारण यह पूरी तरह बंद है। परिवहन ठप होने से ठेका कंपनी को हर दिन लगभग 20 लाख रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है। पिछले 6 दिनों के भीतर कंपनी को अब तक 1 करोड़ रुपये से अधिक की भारी चपत लग चुकी है।
डीजल-मशीनरी रोकी, उत्पादन घटकर रह गया आधा
अयस्क का ट्रांसपोर्टेशन रुकने का सीधा और घातक असर सुरदा माइंस के कुल उत्पादन पर पड़ा है। जहाँ पहले रोजाना करीब 450 टन अयस्क का उत्पादन हो रहा था, वहीं अब यह गिरकर मात्र 200 टन प्रतिदिन रह गया है। आंदोलनकारियों ने माइंस के भीतर संचालन के लिए जरूरी मशीनरी, स्पेयर पार्ट्स, डीजल और अन्य आपातकालीन सामग्रियों की एंट्री पर भी रोक लगा दी है। इसके कारण माइनिंग ऑपरेशंस पर दबाव चरम पर पहुंच गया है।
प्रबंधन का गंभीर आरोप: ‘एक व्यक्ति की जिद से माहौल खराब’
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड और ठेका कंपनी प्रबंधन ने इस पूरे विवाद के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दीपक पातर को जिम्मेदार ठहराया है। प्रबंधन का सीधा आरोप है कि इस बेवजह के अवरोध से न केवल कंपनियों को आर्थिक क्षति हो रही है, बल्कि देश की नवरत्न कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की उत्पादन क्षमता और साख भी प्रभावित हो रही है। प्रबंधन के अनुसार, “महज एक व्यक्ति की जिद की वजह से यहाँ काम करने वाले सैकड़ों स्थानीय श्रमिकों की आजीविका और पूरे क्षेत्र का औद्योगिक माहौल खतरे में पड़ गया है।”
प्रशासन पर फूटा गुस्सा: 5 दिन बाद भी कोई एक्शन नहीं
कंपनी प्रबंधन ने स्थानीय पुलिस और अनुमंडल प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रबंधन का कहना है कि नाकेबंदी शुरू होने के पहले दिन यानी 17 जून को ही लिखित शिकायत देकर जिला व पुलिस प्रशासन को मामले की संवेदनशीलता से अवगत करा दिया गया था। इसके बावजूद करीब 6 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस या दंडात्मक हस्तक्षेप नहीं किया गया है। इस प्रशासनिक सुस्ती के कारण उद्योग जगत में काफी नाराजगी और असुरक्षा का माहौल है।
वार्ता की टेबल से भागे आंदोलनकारी, जल्द हस्तक्षेप की मांग
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के शीर्ष अधिकारियों ने मामले को सुलझाने के लिए आंदोलनकारी दीपक पातर से कई बार बातचीत की कोशिश की और वार्ता का प्रस्ताव भेजा, लेकिन प्रबंधन के मुताबिक वे टेबल टॉक के लिए तैयार नहीं हुए। गतिरोध न टूटने के कारण नाकेबंदी लगातार जारी है। एचसीएल ने अब राज्य सरकार और उच्च अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप कर सुरक्षा मुहैया कराने और परिवहन बहाल कराने की गुहार लगाई है, ताकि राजस्व, रोजगार और उद्योग को और बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
