झारखंड के प्रसिद्ध दलमा वन्यजीव अभयारण्य में बाघों की मौजूदगी के प्रमाण जुटाने के लिए बड़े पैमाने पर कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। राष्ट्रीय टाइगर एस्टीमेशन (बाघ गणना) कार्यक्रम के तहत वन्यजीवों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
पहले दलमा में करीब 50 कैमरा ट्रैप सक्रिय थे, लेकिन अब पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) ने अतिरिक्त 200 कैमरा ट्रैप लगाकर इनकी संख्या 250 कर दी है। इन कैमरों के जरिए बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। गौरतलब है कि 7 फरवरी को दलमा क्षेत्र में एक बाघ देखे जाने की सूचना मिली थी। बताया जाता है कि यह बाघ घाटशिला और चाकुलिया होते हुए दलमा पहुंचा था। यदि इस वर्ष भी यहां बाघ की मौजूदगी दर्ज होती है तो यह क्षेत्र के पर्यावरण और जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत होगा।
टाइगर एस्टीमेशन कार्यक्रम के लिए पलामू टाइगर रिजर्व को झारखंड का नोडल केंद्र बनाया गया है। कैमरा ट्रैप से जुटाए गए सभी आंकड़े पीटीआर को भेजे जाएंगे, जहां से उनका विश्लेषण करने के लिए उन्हें देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को उपलब्ध कराया जाएगा। दलमा मुख्य रूप से हाथियों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां समय-समय पर बाघ, तेंदुआ और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी की सूचनाएं भी मिलती रही हैं। इसी कारण बाघों की संभावित उपस्थिति की पुष्टि के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है।
पीटीआर के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया कि दलमा के कई संवेदनशील क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और इनके माध्यम से बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। उल्लेखनीय है कि झारखंड में बाघों की गणना का कार्य 15 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ था। यह प्रक्रिया चार चरणों में पूरी की जा रही है। राज्य के पांच रिजर्व क्षेत्रों और 31 वन प्रभागों में चल रहे इस सर्वेक्षण की अंतिम रिपोर्ट वर्ष 2027 में जारी होने की संभावना है।
