हर समय टेंशन में रहने से हो सकता है कैंसर? जानिए मानसिक तनाव और इस बीमारी का खतरनाक कनेक्शन

देश में हर 9 में से 1 व्यक्ति को कैंसर का खतरा; जानिए कैसे बढ़ता है रिस्क, क्या हैं मुख्य कारण और बचाव के उपाय।

Johar News Times
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कैंसर आज भी दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है। हाल ही में ‘द जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन’ में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, भारत में हर 9 में से 1 व्यक्ति को कैंसर होने का खतरा है। ये आंकड़े डराने वाले हैं, लेकिन क्या हर समय टेंशन में रहना और मेंटल स्ट्रेस लेना भी इस खतरे को बढ़ाता है? एम्स ने इस गंभीर विषय पर बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। आइए समझते हैं कि तनाव और कैंसर के बीच क्या संबंध है।

क्या मानसिक तनाव से कैंसर होता है?

मानसिक तनाव सीधे तौर पर भले ही कैंसर न करे, लेकिन यह शरीर के भीतर ऐसी स्थितियां पैदा कर देता है जो कैंसर को दावत देती हैं:

  • हार्मोनल बदलाव और सूजन: लगातार तनाव में रहने से शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं और अंदरूनी सूजन (Inflammation) बढ़ जाती है, जो कैंसर के रिस्क को बढ़ाती है।
  • खराब लाइफस्टाइल का डबल अटैक: यदि तनाव के साथ-साथ व्यक्ति का खानपान और लाइफस्टाइल भी खराब है, तो कैंसर होने की आशंका कई गुना अधिक हो जाती है।
  • DNA में बदलाव का खतरा: लंबे समय तक गहरा मानसिक तनाव लेने से शरीर के डीएनए (DNA) में भी बदलाव होने का रिस्क रहता है।

समझें क्या है कैंसर और कैसे फैलता है?

हमारे शरीर में अरबों कोशिकाएं (Cells) होती हैं। जब ये सेल्स असामान्य (Abnormal) होकर अनियंत्रित तरीके से तेजी से बढ़ने लगती हैं, तो उस हिस्से में एक गांठ बन जाती है, जिसे ट्यूमर कहा जाता है।

  • बायोप्सी टेस्ट: ट्यूमर कैंसर वाला है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए बायोप्सी टेस्ट किया जाता है।
  • PET स्कैन: कैंसर की पुष्टि होने पर डॉक्टर ‘पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी’ (PET) स्कैन करते हैं, जिससे यह साफ होता है कि कैंसर शरीर में कहां और कितना फैला है।
  • कार्सिनोजेन क्या है?: हमारे आसपास मौजूद वो केमिकल, फिजिकल या बायोलॉजिकल एजेंट जो सेल के ब्लूप्रिंट को खराब कर कैंसर पैदा करते हैं, उन्हें मेडिकल भाषा में ‘कार्सिनोजेन’ कहा जाता है।

कैंसर होने के मुख्य कारण क्या हैं?

डॉ. रे के मुताबिक, कैंसर के लिए केवल तनाव ही नहीं, बल्कि कई अन्य कारक भी जिम्मेदार हैं:

  1. बिगड़ती जीवनशैली और खानपान: गलत डाइट और शारीरिक सक्रियता की कमी।
  2. प्रदूषण (Pollution): अब सिगरेट न पीने वाले लोगों में भी लंग्स कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) देखा जा रहा है, जिसका बड़ा कारण बढ़ता प्रदूषण है।
  3. मोटापा: ज्यादा वजन और मोटापा कई तरह के कैंसर का कारण बनता है।
  4. अन्य कारण: शराब का अत्यधिक सेवन, प्रोसेस्ड मीट, अल्ट्रावायलेट (UV) रेडिएशन और एचपीवी (HPV) इन्फेक्शन।

राहत की बात: इलाज है मुमकिन

कैंसर का नाम सुनकर डरना स्वाभाविक है, लेकिन आज के समय में यह लाइलाज नहीं है।

कैंसर का जितनी जल्दी पता चल जाए, इलाज उतना ही आसान और प्रभावी होता है। अब मेडिकल साइंस में इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों आ चुकी हैं, जो अंतिम स्टेज के मरीजों की जान बचाने में भी कारगर साबित हो रही हैं।

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