गुड़ाबांदा प्रखंड के पावड़ाडीह गांव में पिछले दो वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रही हेमला सरदार की खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। मामले का संज्ञान लेते हुए बीडीओ डांगुर कोड़ाह, मुखिया फुलमोनी मुर्मू तथा पंचायत सचिव धनाई मुर्मू दुर्गम रास्तों को पार कर खुद गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
पावड़ाडीह गांव तक पहुंचने के लिए अधिकारियों की टीम को मतकमकोचा होते हुए करीब तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। इस दौरान रास्ते में पांच नालों को भी पार करना पड़ा। गांव पहुंचने के बाद अधिकारियों ने हेमला सरदार और उनके परिजनों से मुलाकात की तथा उनकी स्थिति को देखते हुए तत्काल बेहतर इलाज की व्यवस्था करने का निर्णय लिया।

गांव तक सड़क नहीं होने के कारण मरीज को अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हेमला सरदार को खाट पर लादकर करीब एक किलोमीटर तक ढोते हुए मुख्य सड़क तक लाया गया। इसके बाद ममता वाहन के माध्यम से उन्हें धालभूमगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया।
जानकारी के अनुसार, हेमला सरदार पिछले दो वर्षों से बिस्तर पर पड़ी हुई हैं और उनके दोनों पैर काम करना बंद कर चुके हैं। अस्पताल में जांच के दौरान उनका हीमोग्लोबिन मात्र 3 प्रतिशत पाया गया, जिससे उनकी हालत की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

निरीक्षण के दौरान बीडीओ डांगुर कोड़ाह ने गांव तक पहुंचने वाले रास्ते का भी पैदल निरीक्षण किया। उन्होंने संभावित पुल निर्माण, सड़क की लंबाई और अन्य आवश्यक जरूरतों का आकलन किया। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि 18 अप्रैल को हुई ग्रामसभा की प्रति नक्शे के साथ जिला प्रशासन को भेजी जाए। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है कि गांव तक सड़क और पुल निर्माण की दिशा में कितनी जल्दी पहल की जाती है।









