राजनगर के स्कूलों का औचक निरीक्षण, शिक्षा गुणवत्ता और सुविधाओं पर सख्त निर्देश

Johar News Times
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सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत हेरमा पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय हाथीसिरिंग और उत्क्रमित उच्च विद्यालय किता का जिला प्रशासन की ओर से औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों, कक्षा संचालन, उपस्थिति पंजी, मध्यान्ह भोजन, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तृत भौतिक सत्यापन किया गया।

निरीक्षण के क्रम में अधिकारियों ने शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे नियमित और गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन सुनिश्चित करें। बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षा देने, उनकी अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित करने और सीखने के स्तर को लगातार बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही अभिभावक-शिक्षक बैठक नियमित आयोजित करने और विद्यार्थियों व अभिभावकों से मिलने वाली शिकायतों का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए गए।

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मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देते हुए इसे निर्धारित रोस्टर के अनुसार संचालित करने और बच्चों को स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने को कहा गया। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने स्वयं बच्चों से बातचीत कर पढ़ाई, भोजन, पेयजल और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। विद्यार्थियों को नियमित विद्यालय आने, अनुशासन बनाए रखने और पढ़ाई के साथ खेलकूद व सह-पाठयक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।

निरीक्षण में एक महत्वपूर्ण खामी भी सामने आई, जहां उत्क्रमित मध्य विद्यालय हाथीसिरिंग के रसोईघर में लकड़ी से भोजन बनता पाया गया। इस पर जिला शिक्षा पदाधिकारी को तुरंत निर्देश दिया गया कि गैस की व्यवस्था जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए। साथ ही विद्यालय परिसर, कक्षा कक्ष, शौचालय और रसोईघर में नियमित साफ-सफाई बनाए रखने और सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए।

स्थानीय ग्रामीणों ने विद्यालय में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया। इस पर प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे। निरीक्षण के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी राजनगर मलय कुमार और जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार भी मौजूद रहे।

इस औचक निरीक्षण का उद्देश्य विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना है, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

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