रांची: झारखंड में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री महिलाओं को अधिकार देने वाले इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने से बच रहे हैं और उन्होंने मुलाकात के लिए समय तक नहीं दिया।
मुलाकात के लिए नहीं मिला समय
बाबूलाल मरांडी ने बताया कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांग रहे थे ताकि 3 मई को इस अधिनियम पर चर्चा की जा सके। स्पष्ट विषय बताने के बावजूद मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला, जिसके बाद पार्टी ने पत्र के माध्यम से अपना पक्ष रखने का फैसला किया है।
सीटें बढ़ने से महिलाओं को मिलता बड़ा प्रतिनिधित्व
मरांडी ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस अधिनियम के फायदों को गिनाते हुए कहा कि इससे महिलाओं में भारी उत्साह है। उन्होंने दावा किया कि:
- लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होने से उनका नेतृत्व मजबूत होता।
- झारखंड में लोकसभा सीटों की संख्या 14 से बढ़कर 21 होने की संभावना थी।
- राज्य विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 तक पहुँच सकती थीं, जिससे महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलता।
विरोध में मतदान करने का लगाया आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने इस प्रस्ताव का समर्थन करने के बजाय इसके विरोध में मतदान किया है। भाजपा चाहती थी कि राज्य सरकार विशेष सत्र बुलाकर इस प्रस्ताव को पारित करे और केंद्र को भेजे, लेकिन हेमंत सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने इसे महिलाओं के प्रतिनिधित्व के अवसरों को छीनने वाला कदम बताया।
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