सावधान: बच्चों को खाना खिलाते समय मोबाइल देना पड़ सकता है भारी, रिसर्च में हुआ इस गंभीर बीमारी का खुलासा

क्या आप भी अपने बच्चे के हाथ में मोबाइल थमाकर उसे खाना खिलाते हैं?

Johar News Times
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क्या आप भी अपने बच्चे के हाथ में मोबाइल थमाकर उसे खाना खिलाते हैं? या बच्चा रोता है तो उसे चुप कराने के लिए यूट्यूब पर वीडियो लगा देते हैं? अगर हाँ, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है। एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने एक ताजा अध्ययन में चेतावनी दी है कि डिजिटल स्क्रीन की यह लत बच्चों को ‘वर्चुअल ऑटिज्म’ का शिकार बना रही है।

एम्स रायपुर की रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

एम्स रायपुर के शोधकर्ताओं ने 5 साल से कम उम्र के 2,857 बच्चों पर एक विस्तृत ‘मेटा-एनालिसिस’ किया। इस स्टडी में पाया गया कि भारतीय बच्चों का औसत स्क्रीन टाइम 2.22 घंटे प्रतिदिन है। यह वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) द्वारा तय की गई सीमा से लगभग दोगुना है। अक्सर माता-पिता बच्चों को शांत रखने या अपना काम निपटाने के लिए स्क्रीन का सहारा लेते हैं, लेकिन यह तरीका बच्चे के कोमल दिमाग पर गहरा नकारात्मक असर डाल रहा है।

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क्या है ऑटिज्म और स्क्रीन टाइम का संबंध?

एम्स में पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. शेफाली गुलाटी ने बताया कि शुरुआती सालों में बच्चों का दिमाग बहुत संवेदनशील होता है। रिसर्च के अनुसार:

  • जिन बच्चों को 1 साल से कम उम्र में अधिक स्क्रीन एक्सपोजर मिला, उनमें 3 साल की उम्र तक ऑटिज्म के लक्षण विकसित होने का जोखिम बढ़ गया।
  • यह प्रभाव लड़कों में तुलनात्मक रूप से अधिक देखा गया है, हालांकि लड़कियां भी इसकी चपेट में आ रही हैं।
  • डॉक्टरों ने इसे ‘वर्चुअल ऑटिज्म’ का नाम दिया है, क्योंकि इसमें बच्चे के लक्षण क्लिनिकल ऑटिज्म जैसे ही होते हैं।

इन लक्षणों को पहचानना है जरूरी

यदि आपका बच्चा लंबे समय तक मोबाइल या टीवी देखता है, तो उसमें ये बदलाव नजर आ सकते हैं:

  1. आँखों से संपर्क न करना।
  2. नाम पुकारने पर भी प्रतिक्रिया न देना।
  3. बोलने में देरी होना।
  4. सामाजिक मेलजोल से दूरी बना लेना।

विशेषज्ञों की सख्त सलाह

डॉक्टरों का कहना है कि 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को डिजिटल स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। आदर्श स्थिति यह है कि 3 साल की उम्र तक बच्चों को मोबाइल या टैबलेट न दिया जाए। खाना खिलाते समय बच्चों को कहानियाँ सुनाएं या उनके साथ बातचीत करें। मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए उन्हें फिजिकल एक्टिविटी और खिलौनों के साथ व्यस्त रखना ही सबसे बेहतर उपाय है।


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