सरायकेला: लुपुंगडीह पंचायत के बाना गाँव में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ चड़क पूजा संपन्न हुई। इस अवसर पर आयोजित रात्रि जागरण ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विश्व प्रसिद्ध छऊ नृत्य रहा, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से जनसैलाब उमड़ पड़ा।

छऊ नृत्य के माध्यम से पौराणिक कथाओं का मंचन
रात्रि जागरण के दौरान दो प्रसिद्ध छऊ नृत्य पार्टियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कलाकारों ने मुखौटों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत किया:
- शक्ति रूप का प्रदर्शन: देवी दुर्गा के महिमा और उनके शक्ति रूप की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
- दक्ष यज्ञ और सती प्रसंग: राजा दक्ष के अहंकार और माता सती के देहत्याग की करुण एवं ओजपूर्ण कथा का शानदार मंचन किया गया।
श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
बाना गाँव में आयोजित इस चड़क उत्सव में न केवल स्थानीय ग्रामीण, बल्कि आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु पहुँचे। भीषण गर्मी के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और उन्होंने देर रात तक पारंपरिक कला का आनंद लिया।
परंपरा और नई पीढ़ी का जुड़ाव
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि चड़क पूजा के अवसर पर रात्रि जागरण और छऊ नृत्य का आयोजन बाना गाँव की वर्षों पुरानी परंपरा है। इस तरह के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य अपनी लोक संस्कृति को जीवित रखना और नई पीढ़ी को पौराणिक कथाओं व अपने गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराना है।








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