धालभूमगढ़ का मान: पाइटकर कलाकार विजय को राष्ट्रपति भवन से बुलावा, कला जगत में खुशी की लहर

Johar News Times
2 Min Read

धालभूमगढ़/पूर्वी सिंहभूम: झारखंड की विलुप्त होती पारंपरिक कला ‘पाइटकर पेंटिंग’ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ निवासी प्रसिद्ध पाइटकर कलाकार विजय को उनकी उत्कृष्ट कला के लिए राष्ट्रपति भवन से विशेष आमंत्रण प्राप्त हुआ है। यह सम्मान न केवल विजय के लिए, बल्कि पूरे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का क्षण है।

पारंपरिक कला के संरक्षण का मिला फल

विजय पिछले कई वर्षों से पाइटकर पेंटिंग की प्राचीन परंपरा को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए समर्पित हैं। उनकी कलाकृतियों में झारखंड के आदिवासी जीवन, लोक गाथाओं, परंपराओं और प्रकृति के जीवंत रंगों का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। राष्ट्रपति भवन से मिला यह बुलावा उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत और कला के प्रति अटूट निष्ठा का राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान है।

- Advertisement -
Ad image

क्या है पाइटकर पेंटिंग?

पाइटकर पेंटिंग को भारत की सबसे पुरानी लोक कलाओं में से एक माना जाता है, जिसे ‘स्क्रॉल पेंटिंग’ भी कहते हैं। इस कला के माध्यम से कलाकार कहानियों को चित्रों के रूप में उकेरते हैं। विजय जैसे कलाकारों के प्रयासों से ही यह कला आज राष्ट्रीय फलक पर अपनी चमक बिखेर रही है।

इस खबर के बाद धालभूमगढ़ समेत पूरे जिले के कला प्रेमियों में हर्ष का माहौल है। विजय को इस उपलब्धि के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी बधाई दी है।


जोहार न्यूज़ टाइम्स के साथ जुड़ें और पाएं हर पल की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें। लेटेस्ट अपडेट्स सबसे पहले पाने के लिए हमारे प्लेटफॉर्म को अभी लाइक, सब्सक्राइब और विजिट करें।”–joharnewstimes.com

Share This Article