दुमका: जिला प्रशासन दुमका को ‘सिल्क सिटी’ के रूप में एक नई पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। मंगलवार को उपायुक्त अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में सिल्क बोर्ड से संबंधित एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के सिल्क उद्योग को पुनर्जीवित और विकसित करने की रणनीति तैयार की गई।
समन्वय से बनेगा सिल्क हब बैठक में मयूराक्षी सिल्क, JSLPS, झारक्राफ्ट, रेशम विभाग और सेंट्रल सिल्क बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हुए। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि दुमका में सिल्क उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इसे धरातल पर उतारने के लिए सभी विभागों को एकजुट होकर काम करना होगा।
बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय:
- कोकून बैंक की स्थापना: उपायुक्त ने सिल्क उत्पादन की नींव मजबूत करने के लिए जल्द से जल्द ‘कोकून बैंक’ हेतु उपयुक्त स्थान चिन्हित करने का निर्देश दिया है।
- विभागों का कार्य विभाजन: प्रत्येक विभाग और संस्था को उनकी विशिष्ट भूमिकाओं और दायित्वों से अवगत कराया गया, ताकि कार्य के दौरान किसी भी प्रकार का दोहराव या भ्रम न हो।
- मार्केटिंग पर जोर: सिल्क उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादों, विशेषकर सिल्क साड़ियों की प्रभावी मार्केटिंग सुनिश्चित करने के लिए एक ‘फूल-प्रूफ’ कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया गया।
- जेएसएलपीएस की भूमिका: रेशम कीट पालन और कताई कार्य में ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को जोड़ने पर भी चर्चा की गई।
सिल्क सिटी की ओर बढ़ते कदम उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर एक ऐसी सुदृढ़ प्रणाली विकसित करें, जिससे स्थानीय बुनकरों और उत्पादकों को सीधा लाभ मिल सके। इस पहल से न केवल दुमका का सिल्क ब्रांड बनेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े अवसर भी पैदा होंगे।









