घाटशिला (पूर्वी सिंहभूम): वर्ष 1988 के ऐतिहासिक झारखंड आंदोलन की यादों को ताजा करने के लिए घाटशिला में एक भव्य स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उस दौर के संघर्ष के नायकों को सम्मानित कर राज्य निर्माण की नींव रखने वाले बलिदानों को याद किया गया।

मुखिया अर्जुन मार्डी की अध्यक्षता में मंथन
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय मुखिया अर्जुन मार्डी ने की। सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय जनप्रतिनिधि और वे पुराने चेहरे शामिल हुए जिन्होंने अलग राज्य की मांग के लिए सड़कों पर संघर्ष किया था।
‘जल, जंगल और जमीन’ की रक्षा ही मूल आधार
मुख्य वक्ता कानू सामंत ने 1988 के उस दौर का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन केवल एक राजनीतिक मांग नहीं थी, बल्कि यह हमारी अस्मिता, जल, जंगल और जमीन की रक्षा की लड़ाई थी। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे उस समय के छोटे-छोटे संघर्षों ने मिलकर एक विशाल जन-आंदोलन का रूप लिया और अंततः अलग झारखंड राज्य का मार्ग प्रशस्त किया।
बबलू मुर्मू के नेतृत्व में हुआ सम्मान
आंदोलनकारी बबलू मुर्मू के नेतृत्व में उस दौर के कठिन समय और पुलिसिया दमन के बीच कार्यकर्ताओं के अडिग साहस को याद किया गया। सभा के दौरान:
- सम्मान समारोह: उपस्थित सभी पुराने आंदोलनकारियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
- श्रद्धांजलि: उन शहीदों को भी याद किया गया जिन्होंने इस लंबे सफर में अपनी जान गंवाई।
आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज हम जिस झारखंड में सांस ले रहे हैं, वह इन सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की देन है। इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। युवाओं से अपील की गई कि वे इन महापुरुषों के आदर्शों को अपनाएं और राज्य के नवनिर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।










