रांची: झारखंड में सालों से लटके स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति विवाद (2016) को सुलझाने के लिए हाईकोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी इस मामले की तह तक जाने के लिए बनाए गए ‘वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन’ के अध्यक्ष होंगे।
क्यों बनी जांच आयोग की जरूरत?
साल 2016 में शुरू हुई हाईस्कूल शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया शुरू से ही विवादों के घेरे में रही है। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अदालत में कुल 258 याचिकाएं दायर की गई थीं। मुख्य विवाद के बिंदु निम्नलिखित हैं:
- मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी: कई अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनके अंक कटऑफ से ज्यादा होने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ।
- जिला बनाम राज्य स्तरीय चयन: जिला और राज्य स्तर पर बनी मेरिट लिस्ट के आधार पर हुई नियुक्तियों में भारी विसंगतियां पाई गईं।
- नियुक्ति से वंचित: योग्य उम्मीदवार सालों से इंसाफ के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।
रिटायर्ड जस्टिस एसएन पाठक ने जताई थी असमर्थता
इससे पहले हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस एसएन पाठक को इस आयोग की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन उनके द्वारा असमर्थता जताए जाने के बाद अब जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
अगले 3 महीने होंगे निर्णायक
कोर्ट ने आयोग के लिए सख्त समयसीमा तय की है:
- फैक्ट फाइंडिंग: एक सदस्यीय आयोग पूरे मामले के दस्तावेजों और शिकायतों की बारीकी से जांच करेगा।
- रिपोर्ट सबमिशन: आयोग को 3 महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी।
- कैबिनेट का फैसला: रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य कैबिनेट इस पर अंतिम निर्णय लेगी कि विवाद का समाधान कैसे किया जाए और वंचितों को नियुक्ति कैसे दी जाए।
रिक्त पदों पर भी कोर्ट सख्त
विवाद की जांच के साथ-साथ झारखंड हाईकोर्ट ने अन्य रिक्त पदों पर रुकी हुई नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि शेष पदों को भरने के लिए जल्द से जल्द समयसीमा (Deadline) तय की जाए।
निष्कर्ष: जस्टिस गौतम चौधरी की यह रिपोर्ट न केवल 2016 के विवाद को खत्म करेगी, बल्कि झारखंड में भविष्य की शिक्षक नियुक्तियों के लिए भी एक पारदर्शी रास्ता साफ करेगी। हजारों अभ्यर्थियों की नजरें अब इस ‘वन मैन कमीशन’ की जांच पर टिकी हैं।










