जमशेदपुर: लौहनगरी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम (MGM) में सोमवार सुबह से उपजा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। मानदेय वृद्धि और अन्य मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार पर गए जूनियर डॉक्टरों ने अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन के साथ हुई सफल वार्ता के बाद हड़ताल वापस ले ली है।
मैराथन वार्ता के बाद बनी सहमति
सुबह से ही स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने के कारण मरीजों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए प्रशासन रेस हुआ। अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासनिक अधिकारियों ने हड़ताली डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ लंबी बैठक की।
- सकारात्मक आश्वासन: प्रशासन की ओर से डॉक्टरों की जायज मांगों, विशेषकर मानदेय (Stipend) में बढ़ोतरी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस और सकारात्मक पहल करने का भरोसा दिया गया।
- आंदोलन वापसी: अधिकारियों के लिखित और मौखिक आश्वासन के बाद जूनियर डॉक्टरों ने जनहित में अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया।
मरीजों ने ली राहत की सांस
हड़ताल खत्म होने की घोषणा के साथ ही अस्पताल में छाई वीरानी दूर होने लगी है:
- सेवाएं बहाल: ओपीडी और अन्य वार्डों में जूनियर डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर लौट आए हैं।
- मरीजों को राहत: सुबह से इलाज के लिए भटक रहे सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों ने इस फैसले के बाद राहत की सांस ली है।
- धीरे-धीरे सामान्य होते हालात: शाम तक अस्पताल की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रबंधन का संकल्प
अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों की समस्याओं के समाधान के लिए एक समय सीमा के भीतर कदम उठाए जाएंगे। प्रबंधन का लक्ष्य है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, जिससे गरीब मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़े।
फिलहाल, एमजीएम में सफेद कोट वाले ‘धरती के भगवान’ वापस अपने काम पर हैं और स्वास्थ्य सेवाओं का पहिया फिर से घूमने लगा है।
ब्यूरो रिपोर्ट, जमशेदपुर।










