झारखंड: पेसा कानून से और सशक्त हुई ग्रामसभा, अब छोटे विवादों पर लगा सकेंगी ₹2000 तक का जुर्माना

Jharkhand: Gram Sabhas further empowered by the PESA Act, can now impose fines of up to ₹2,000 on minor disputes.

Johar News Times
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रांची (ब्यूरो): झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन (Self-Governance) को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। पेसा कानून (PESA Act 1996) के तहत अब ग्रामसभाओं को न्यायिक और दंडात्मक अधिकार दिए गए हैं, जिसके तहत वे अपने क्षेत्र में नियम उल्लंघन या छोटे विवादों के मामलों में अधिकतम ₹2000 तक का जुर्माना लगा सकेंगी।

थाना-कोर्ट के चक्करों से मिलेगी मुक्ति

इस नए प्रावधान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर ही विवादों का त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।

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  • त्वरित न्याय: अब गांव के छोटे-मोटे झगड़ों या सामाजिक नियमों के उल्लंघन के लिए ग्रामीणों को प्रखंड, थाना या जिला कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
  • संसाधनों की बचत: स्थानीय स्तर पर फैसले होने से ग्रामीणों के समय और पैसे, दोनों की बचत होगी।

किन मामलों में चलेगा ग्रामसभा का डंडा?

ग्रामसभा को मिले ये अधिकार एक निश्चित दायरे में काम करेंगे:

  1. सामाजिक नियम: गांव के पारंपरिक और सामाजिक नियमों का उल्लंघन करने पर।
  2. अवैध गतिविधियां: ग्राम स्तर पर होने वाली छोटी-मोटी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए।
  3. स्थानीय विवाद: आपसी छोटे विवाद जिनका समाधान आपसी सहमति या पारंपरिक तरीके से संभव हो।नोट: गंभीर आपराधिक मामलों (जैसे हत्या, डकैती आदि) में कानूनी प्रक्रिया पहले की तरह पुलिस और कोर्ट के माध्यम से ही संचालित होगी।

पारंपरिक शासन प्रणाली को नई ऊर्जा

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से झारखंड की समृद्ध पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था (जैसे मांझी-परगना, मुंडा-मानकी आदि) को कानूनी मान्यता और मजबूती मिलेगी। इससे न केवल गांव के मुद्दों में लोगों की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि स्वशासन की जड़ें भी गहरी होंगी।

चुनौतियां और विशेषज्ञों की राय

जहां एक ओर इस कदम की सराहना हो रही है, वहीं विशेषज्ञों ने इसके क्रियान्वयन को लेकर कुछ सुझाव भी दिए हैं:

  • उचित प्रशिक्षण: ग्रामसभा के सदस्यों को कानून के दायरे और जुर्माने की प्रक्रिया का सही प्रशिक्षण देना अनिवार्य होगा।
  • निगरानी तंत्र: यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि इन अधिकारों का दुरुपयोग किसी व्यक्तिगत रंजिश या भेदभाव के लिए न हो।

निष्कर्ष: पेसा कानून के तहत ग्रामसभाओं को मिला यह वित्तीय और न्यायिक अधिकार ग्रामीण झारखंड के सशक्तिकरण में ‘मील का पत्थर’ साबित होगा। अब देखना यह है कि धरातल पर यह व्यवस्था कितनी पारदर्शिता के साथ लागू हो पाती है।

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क्षेत्र: झारखंड के सभी अनुसूचित जिले (Scheduled Areas) कानून: पेसा अधिनियम (PESA Act), 1996

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