घाटशिला अनुमंडल के शिक्षकों में भारी आक्रोश, 10 अप्रैल को राजभवन के समक्ष महाधरना की घोषणा
घाटशिला | संवाददाता राज्य के वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के प्रति सरकार और विभाग के उदासीन रवैये के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा 223 संस्थानों के अनुदान को अस्वीकृत किए जाने के विरोध में शनिवार को घाटशिला सहित विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा सचिव का पुतला दहन किया गया। शिक्षकों ने विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस निर्णय को एक “सुनियोजित साजिश” करार दिया।
विवाद का मुख्य कारण: तकनीकी खामी या लापरवाही?
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 523 स्कूलों और इंटर कॉलेजों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इनमें से अधिकांश आवेदनों को जैक (JAC) और जिला शिक्षा पदाधिकारी की अनुशंसा प्राप्त थी। इसके बावजूद, अनुदान समिति ने 223 संस्थानों के आवेदन निम्नलिखित कमियां बताकर खारिज कर दिए:
- शासी निकाय (Governing Body) से संबंधित पत्रों का अभाव।
- बंधक विलेख (Mortgage Deed) और उपयोगिता प्रमाण पत्र की कमी।
- पोर्टल पर दस्तावेजों का प्रदर्शित न होना।
मोर्चा का तर्क: ‘वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के नेताओं का कहना है कि पोर्टल पहली बार लागू किया गया था, जिसमें भारी तकनीकी त्रुटियां थीं। शिक्षकों ने सभी दस्तावेज अपलोड किए थे, लेकिन पोर्टल की खराबी के कारण वे गायब हो गए। बाद में हार्ड कॉपी जमा करने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
आंदोलन की रणनीति: चरणबद्ध प्रदर्शन
मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। आगामी दिनों के लिए तय कार्यक्रम इस प्रकार हैं:
| तिथि | कार्यक्रम | स्थान/विवरण |
| 10 अप्रैल 2026 | महाधरना | राजभवन (रांची) के समक्ष प्रदर्शन एवं राज्यपाल को ज्ञापन। |
| 12 अप्रैल 2026 | ज्ञापन सौंपना | मुख्यमंत्री को मामले से अवगत कराया जाएगा। |
| 15-20 अप्रैल 2026 | विधायक संपर्क | विभिन्न क्षेत्रों के विधायकों के माध्यम से हस्तक्षेप की मांग। |
नेताओं ने कहा- “संस्थानों को बंद करने की साजिश”
पुतला दहन के दौरान रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा और फजलुल कदीर अहमद सहित अन्य नेताओं ने साझा बयान में कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विकल्पों को पोर्टल से हटाना और परिवाद पत्रों के नाम पर दोहरा मापदंड अपनाना यह दर्शाता है कि विभाग इन संस्थाओं को बंद करना चाहता है। उन्होंने 21 विद्यालयों के अनुदान विस्तार को रोकने और 158 विद्यालयों को अगले वर्ष से वंचित करने के निर्णय पर भी तीखे सवाल उठाए।
नारेबाजी से गूंजा परिसर: > पुतला दहन के दौरान शिक्षकों ने “शिक्षा सचिव को हटाओ, वित्त रहित संस्थाओं को बचाओ” और “हमारी मांगें पूरी करो” जैसे गगनभेदी नारे लगाए।
इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से गणेश महतो, अरविंद सिंह, चंदेश्वर पाठक, देवनाथ सिंह, संजय कुमार, मनोज तिर्की, विनय उरांव, बरसो उरांव, नरोत्तम सिंह, रघु विश्वकर्मा, रेशमा बेक और मुरारी प्रसाद सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित थे।










