झारखंड के सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी टाइपिंग प्रशिक्षण अनिवार्य, पोर्टल पर शुरू हुआ विशेष कोर्स

Johar News Times
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झारखंड सरकार के राजभाषा विभाग ने राज्य के प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता, गति और मातृभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने राज्य के सभी स्तर के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी टाइपिंग (टंकण) प्रशिक्षण को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। इस प्रशिक्षण को सुगम बनाने के लिए केंद्र सरकार के डिजिटल शिक्षण मंच ‘आईगॉट कर्मयोगी’ (iGOT Karmayogi) पोर्टल पर एक विशेष कोर्स लॉन्च किया गया है।

इस संबंध में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो ने राज्य के सभी विभागों के अध्यक्षों, प्रमंडलीय आयुक्तों और सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने अधीनस्थ कार्यरत सभी कर्मियों को समय सीमा के भीतर यह ऑनलाइन कोर्स पूरा कराना सुनिश्चित करें।

कार्यालयी कार्यों में आएगी तेजी, दक्षता बढ़ाना मुख्य उद्देश्य

राजभाषा विभाग के अनुसार, वर्तमान डिजिटल युग में सरकारी कार्यालयों के फाइलों और दस्तावेजों का त्वरित व प्रभावी निष्पादन (Execution) बेहद जरूरी है। चूंकि झारखंड की आधिकारिक भाषा हिंदी है, इसलिए सभी कर्मियों की हिंदी टंकण दक्षता (Typing Efficiency) बढ़ाना अनिवार्य हो गया है। इस विशेष कोर्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कर्मचारी बिना किसी अतिरिक्त कक्षा के, अपने कार्य समय के दौरान ही अपनी कार्यक्षमता और टाइपिंग स्पीड को अपग्रेड कर सकें।

क्या है ‘मिशन कर्मयोगी’ और ‘iGOT’ पोर्टल?

मिशन कर्मयोगी: यह केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी सिविल सेवा क्षमता निर्माण (Capacity Building) पहल है। इसके तहत सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

iGOT डिजिटल प्लेटफॉर्म: इसी मिशन के तहत विकसित एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म है, जहां अब तक सैकड़ों तकनीकी और प्रशासनिक कोर्स उपलब्ध थे। अब इसी फेहरिस्त में झारखंड के संदर्भ को जोड़ते हुए विशेष हिंदी टाइपिंग कोर्स को भी शामिल कर दिया गया है।

जिला प्रशासनों को निर्देश: जल्द पूरी की जाए प्रक्रिया

कार्मिक विभाग ने सभी जिला प्रशासनों और विभागाध्यक्षों से अनुरोध किया है कि वे अपने विभागों में इस कोर्स की प्रगति की नियमित समीक्षा करें। सरकार का दृढ़ विश्वास है कि इस कदम से न केवल सरकारी दफ्तरों में हिंदी के उपयोग को भारी बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आम जनता से जुड़ी फाइलों और प्रशासनिक कार्यों की गति भी काफी तेज होगी, जिससे लोगों को योजनाओं का लाभ जल्द मिल सकेगा।

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