सरायकेला में खाकी दागदार: आदिवासी युवती से मारपीट के आरोप में कपाली ओपी प्रभारी समेत 3 पुलिसकर्मी निलंबित

सरायकेला में आदिवासी युवती पर हाथ उठाना पुलिसकर्मियों को पड़ा भारी, कपाली ओपी प्रभारी समेत 3 सस्पेंड!

Johar News Times
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सरायकेला : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से खाकी को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। चाण्डिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा पुनर्वास कॉलोनी में एक आदिवासी युवती के साथ बर्बरता, मारपीट और बल प्रयोग करने के आरोप में पुलिस अधीक्षक ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कपाली ओपी के थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

यह शर्मनाक घटना 15 जून 2026 को चाण्डिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कांदरबेड़ा पुनर्वास कॉलोनी की है। यहाँ कपाली ओपी के कुछ पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों द्वारा एक आदिवासी युवती के साथ कथित रूप से हिंसा की गई और पद का दुरुपयोग करते हुए बल प्रयोग किया गया।

जब यह मामला सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया। एसपी ने बिना वक्त गंवाए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी चाण्डिल को इस पूरे मामले की ऑन-स्पॉट जांच करने का सख्त निर्देश दिया।

जांच में दोषी पाए गए ये 3 पुलिसकर्मी

एसडीपीओ चाण्डिल द्वारा की गई त्वरित जांच की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया तीन पुलिसकर्मियों की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध और दोषी पाई गई। इसके आधार पर एसपी ने निम्नलिखित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है:

  • पु.अ.नि. धीरंजन कुमार (थाना प्रभारी, कपाली ओपी)
  • स.अ.नि. मो. मुकलेश्वर रहमान (कपाली ओपी)
  • महिला आरक्षी-981 कंचन (कपाली ओपी)

“कमजोर वर्गों के साथ हिंसा पर जीरो टॉलरेंस”

जांच रिपोर्ट टेबल पर आते ही पुलिस अधीक्षक ने तीनों आरोपियों को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही इन तीनों के खिलाफ विभागीय और विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जिला पुलिस कप्तानी ने साफ संदेश दिया है कि आम जनता और खासकर समाज के कमजोर व आदिवासी वर्गों के साथ पुलिस की ऐसी गुंडागर्दी और बर्बरता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

पीड़िता को न्याय दिलाने की प्रक्रिया शुरू

एसपी कार्यालय के अनुसार, झारखंड पुलिस विभाग में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ अपनाई गई है। दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों पर कानून के मुताबिक कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। इधर, पीड़ित आदिवासी युवती का बयान दर्ज कर उसे पूर्ण न्याय दिलाने के लिए आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से चलाई जा रही है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

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