सीधे बैठो”, “झुककर मत चलो”, “पढ़ते समय पीठ सीधी रखो”… ये ऐसे जुमले हैं जो हर घर में माता-पिता अपने बच्चों को टोकते हुए इस्तेमाल करते हैं। अक्सर पेरेंट्स इसे बच्चे की खराब आदत या खराब बॉडी पोस्चर मान लेते हैं। लेकिन सावधान! अगर आपका बच्चा बार-बार टोकने पर भी झुककर बैठ रहा है, तो यह सिर्फ उसकी आदत नहीं, बल्कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक बीमारी हो सकती है।
बच्चों में इस तरह लगातार झुकने के पीछे स्कोलियोसिस (Scoliosis) नाम की समस्या जिम्मेदार हो सकती है।
क्या है स्कोलियोसिस
स्कोलियोसिस रीढ़ की हड्डी (Spine) से जुड़ी एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें रीढ़ की हड्डी सीधी रहने के बजाय असामान्य रूप से एक तरफ झुकने या मुड़ने लगती है।
- प्रभावित उम्र: यह समस्या आमतौर पर बच्चों के तेजी से बढ़ने की उम्र, यानी 10 से 15 साल के बीच विकसित होती है।
- साइलेंट बीमारी: इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती स्टेज में इसके कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते। रीढ़ की हड्डी का घुमाव इतनी धीमी गति से बढ़ता है कि रोजमर्रा की जिंदगी में इसका पता ही नहीं चलता।
इन छोटे-छोटे संकेतों को पहचानें
अक्सर पेरेंट्स जिन बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं, वे स्कोलियोसिस के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं:
- कंधों का असमान होना: बच्चे का एक कंधा दूसरे कंधे के मुकाबले थोड़ा ऊपर या नीचे दिखाई देना।
- कपड़ों की फिटिंग बिगड़ना: स्कूल यूनिफॉर्म या कोई भी कपड़ा शरीर पर दोनों तरफ से बराबर फिट न बैठना।
- बैग का बार-बार सरकना: पीठ पर टांगा गया स्कूल बैग बार-बार एक ही कंधे से नीचे की तरफ सरकना।
भारी स्कूल बैग या गलत पोस्चर नहीं है वजह!
आम तौर पर लोग मान लेते हैं कि भारी स्कूल बैग उठाने या गलत तरीके से बैठने के कारण रीढ़ की हड्डी मुड़ गई है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह धारणा पूरी तरह गलत है।
- इसका कोई एक ठोस कारण अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे जेनेटिक्स (आनुवंशिकी) एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।
- यह बीमारी लड़कों और लड़कियों दोनों को हो सकती है, लेकिन लड़कियों में (विशेषकर प्यूबर्टी/किशोरावस्था के आसपास) इसका जोखिम कहीं ज्यादा देखा गया है।
क्या है इसका इलाज?
घबराने की बात नहीं है, क्योंकि स्कोलियोसिस से पीड़ित ज्यादातर बच्चों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती।
- शुरुआती जांच: नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप करवाएं।
- थेरेपी: हल्के मामलों को फिजियोथेरेपी और स्कोलियोसिस की विशेष एक्सरसाइज के जरिए ठीक किया जा सकता है।
- ब्रेसिंग: कुछ मामलों में रीढ़ को सीधा रखने के लिए डॉक्टरों द्वारा बेल्ट या ब्रेस पहनने की सलाह दी जाती है।
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि रीढ़ की हड्डी का घुमाव कितना गंभीर है और बच्चे की उम्र कितनी है। इसलिए किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत स्पाइन स्पेशलिस्ट से सलाह लें।
