ओमान के डुक्म पोर्ट पर भारतीय नाविक का निधन: जहाज ‘एमटी सेलेस्टियल’ पर बिगड़ी थी तबीयत, शव लाने में जुटा भारतीय दूतावास

"ड्यूटी के दौरान थमी सांसें! ओमान में भारतीय नाविक निशांत का निधन, मस्कट में कानूनी प्रक्रिया तेज।"

Johar News Times
3 Min Read

ओमान के डुक्म पोर्ट पर खड़े एक टैंकर जहाज पर कार्यरत भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन का स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण अचानक निधन हो गया। वे ‘एमटी सेलेस्टियल’ नामक जहाज पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस दुखद घटना के बाद मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

ड्यूटी के दौरान अचानक बिगड़ी थी तबीयत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाविक निशांत उर्थनाथन जहाज पर अपनी नियमित ड्यूटी पर थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बेहद खराब हो गई। जहाज पर ही प्राथमिक उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। घटना की गंभीरता को देखते हुए जहाज प्रबंधन ने तुरंत स्थानीय ओमानी प्रशासन और मस्कट में भारतीय दूतावास को इस बात की सूचना दी।

शव को भारत भेजने की कागजी कार्रवाई तेज

ओमान में भारतीय दूतावास ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि मृतक नाविक का शव फिलहाल सुरक्षित रूप से जहाज पर ही रखा गया है। दूतावास के अधिकारी ओमान के स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर सभी आवश्यक कानूनी, चिकित्सीय और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने में जुटे हैं। इसके साथ ही भारतीय अधिकारी लगातार मृतक के शोक संतप्त परिवार के संपर्क में हैं और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।

आंकड़े: समंदर में भारत के ‘जांबाज’

भारत वर्तमान में वैश्विक नौवहन क्षेत्र में सबसे बड़े मानव संसाधन प्रदाताओं में से एक है।

दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों पर 3 लाख से अधिक भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

अकेले मध्य-पूर्व के समुद्री क्षेत्र में 18 हजार से ज्यादा भारतीय नाविक तैनात हैं।

नाविकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

इस दुखद हादसे के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों की स्वास्थ्य सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। समुद्री मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि महीनों तक गहरे समंदर में रहने वाले इन कर्मियों के लिए जहाजों पर ही बेहतर स्वास्थ्य निगरानी और त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सहायता की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

Share This Article