ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद की जमानत याचिका खारिज; छात्रों ने कहा- “एक को जेल, दूसरे को बेल क्यों?”; खान सर की गिरफ्तारी पर फिलहाल कोर्ट की रोक,
पटना में खान सर की कोचिंग से जुड़े विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद की रिहाई की मांग को लेकर मंगलवार को छात्र तीसरी बार सड़कों पर उतर आए। छात्रों ने पटना कॉलेज से कारगिल चौक तक मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। स्थिति को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और वाटर कैनन वाहन भी मौके पर रखा गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने रौशन आनंद की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना निष्पक्ष जांच के किसी को जेल भेजना न्यायसंगत नहीं है। छात्रों का आरोप था कि मामले में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर गंभीर आरोप हैं, वह बाहर है, जबकि रौशन आनंद को जेल में रखा गया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

इधर, मंगलवार को पटना की अदालत ने रौशन आनंद की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। इसके साथ ही उनकी रिहाई की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगा है। वहीं दूसरी ओर, फायरिंग मामले में खान सर को राहत मिली है। पटना सिविल कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगले आदेश तक खान सर के खिलाफ कोई कठोर या दबावपूर्ण कार्रवाई नहीं की जाएगी।
खान सर की ओर से पेश अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने अदालत में दलील दी कि गोली आत्मरक्षा में चलाई गई थी और किसी प्रकार का भय या दहशत फैलाना उद्देश्य नहीं था। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 जून को निर्धारित की है। इस बीच, खान सर के दो सुरक्षा गार्ड दीपक कुमार और तालेबर सिंह की जमानत याचिका पर भी सुनवाई हुई। अदालत ने पुलिस से मामले से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है। दोनों गार्डों को 4 जून को गिरफ्तार किया गया था और उनके खिलाफ हत्या के प्रयास तथा आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में दावा किया गया है कि खान सर ने अपने सुरक्षा गार्डों से कहा था, “तुम गोली चलाओ, बाकी मैं देख लूंगा।” इसी आरोप की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले को लेकर पटना में छात्र संगठनों और कोचिंग संस्थानों के बीच बहस तेज हो गई है, जबकि पूरे घटनाक्रम पर अब अदालत और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
