नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े उलटफेर के बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर और बहरामपुर से टीएमसी सांसद यूसुफ पठान भी पार्टी के बागी खेमे में शामिल हो गए हैं। वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 सांसदों के समूह ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। बताया जा रहा है कि बागी सांसदों का यह समूह संसद में अलग गुट के रूप में अपनी पहचान चाहता है और एनडीए के प्रति समर्थन जताने की तैयारी कर चुका है। काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि उनके साथ टीएमसी के 20 सांसद हैं, जिनमें यूसुफ पठान भी शामिल हैं।
यूसुफ पठान का नाम सामने आने से इस बगावत का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। बहरामपुर से सांसद बने यूसुफ पठान को टीएमसी ने बड़े राजनीतिक दांव के रूप में मैदान में उतारा था, लेकिन अब उनका बागी खेमे के साथ खड़ा होना पार्टी नेतृत्व के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। इस बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी यूसुफ पठान पर निशाना साधते हुए उन पर अप्रत्यक्ष हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता के भरोसे से चुने गए जनप्रतिनिधियों को अपने राजनीतिक निर्णयों में जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। ऐसे में 20 सांसदों का एक साथ अलग होना पार्टी के संसदीय इतिहास की सबसे बड़ी टूट साबित हो सकती है। बागी खेमे की रणनीति दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखकर बनाई गई बताई जा रही है। टीएमसी के भीतर मचे इस सियासी भूचाल के बाद अब सबकी नजर ममता बनर्जी की अगली राजनीतिक रणनीति और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।
