नाम भूलना है नॉर्मल, लेकिन ‘चेहरा’ भूलना खतरनाक बीमारी का संकेत! एक्सपर्ट्स ने दी बड़ी चेतावनी

लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसी का नाम भूलना और चेहरा भूलना, दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं?

Johar News Times
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अक्सर किसी पार्टी या समारोह में ऐसा होता है कि आप सामने खड़े इंसान को पहचान तो लेते हैं, लेकिन उसका नाम दिमाग से स्लिप हो जाता है। अमूमन लोग इसे सामान्य भूलने की बीमारी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसी का नाम भूलना और चेहरा भूलना, दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं? हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहां नाम भूलना एक आम बात है, वहीं किसी अपने का चेहरा न पहचान पाना किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल (दिमागी) बीमारी का शुरुआती लक्षण हो सकता है।

दिमाग में काम करते हैं दो अलग ‘सिस्टम’

किसी का नाम भूलना और किसी का चेहरा भूलना देखने में एक जैसा लग सकता है, लेकिन इनके पीछे काम करने वाले ब्रेन नेटवर्क पूरी तरह अलग होते हैं। यह मूल रूप से पहचान (Recognition) और स्मरण (Recall) के बीच का अंतर है।”

  • नाम याद रखना: यह भाषा और याददाश्त से जुड़े नेटवर्क पर निर्भर करता है। नाम सिर्फ एक ‘लेबल’ होता है, जिसका किसी छवि से सीधा कनेक्शन नहीं होता। इसलिए तनाव, थकान या व्यस्तता में नाम भूलना पूरी तरह सामान्य है।
  • चेहरा पहचानना: इंसानी दिमाग में चेहरों को पहचानने के लिए एक स्पेशल ‘विजुअल रिकग्निशन नेटवर्क’ होता है। इवोल्यूशन (मानव विकास) के दौर से ही इंसान खतरों और अपनों की पहचान चेहरे से करता आया है।

क्या यह डिमेंशिया या अल्जाइमर की शुरुआत है?

रिसर्च के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति चेहरों को पहचानने की क्षमता खोने लगता है, तो मेडिकल भाषा में इस स्थिति को प्रोसोपैग्नोसिया (Prosopagnosia) यानी ‘फेस ब्लाइंडनेस’ कहा जाता है।

गंभीर बात यह है कि इसका सीधा संबंध अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s) और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia) जैसी खतरनाक बीमारियों से हो सकता है। कई मामलों में न्यूरोकॉग्निटिव गिरावट (दिमागी कमजोरी) के अन्य लक्षण सामने आने से पहले ही व्यक्ति अपनों के चेहरे भूलने लगता है।

कब हो जाएं सावधान? डॉक्टर से कब लें सलाह?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बढ़ती उम्र के साथ कभी-कभार नाम भूल जाना चिंता की बात नहीं है, लेकिन नीचे दिए गए लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए:

  • करीबियों को न पहचानना: यदि कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी, बच्चों या बेहद करीबी दोस्तों का चेहरा पहचानने में असमर्थ होने लगे।
  • रोजमर्रा पर असर: भूलने की यह आदत बार-बार होने लगे और बढ़ती चली जाए।
  • दैनिक जीवन प्रभावित होना: जब यह समस्या आपके सामाजिक या व्यावहारिक जीवन में बाधा बनने लगे।

हर छोटी भूल पर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर चेहरा भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही है, तो इसे सामान्य उम्र बढ़ना न समझें और तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट या एक्सपर्ट से सलाह लें।

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