केंद्र सरकार को घेरने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए सोमवार को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की एक अहम बैठक हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में संसद से लेकर सड़क तक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए 5 प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी। हालांकि, इस बैठक में द्रविड़ मुनेत्र कषगम और आम आदमी पार्टी की गैरमौजूदगी ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
इन 5 बड़े मुद्दों पर बनी विपक्षी एकजुटता
बैठक में शामिल दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति के तहत निम्नलिखित पांच फैसलों पर मुहर लगाई:
- बिहार के एसआईआर मामले को लेकर मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा जाएगा।
- छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों और पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जाएगी।
- देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की जाएगी।
- संसद सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय के लिए नेता प्रतिपक्ष की अध्यक्षता में प्रतिदिन समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।
- गठबंधन के बीच बेहतर तालमेल के लिए अब हर दो महीने में ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक होगी। अगली बैठक हैदराबाद में आयोजित की जाएगी।
खरगे का केंद्र पर वार: “संविधान पर लगातार हो रहे हैं हमले”
बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने याद दिलाया कि विपक्ष ने 17 अप्रैल को संविधान संशोधन विधेयक को पारित होने से रोककर अपनी एकजुटता की ताकत दिखाई थी। खरगे ने आरोप लगाया कि:
“देश में संविधान पर लगातार हमले हो रहे हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल कर विपक्ष को दबाया जा रहा है और गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।”
इस बैठक में राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए। बैठक से पहले सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात भी आकर्षण का केंद्र रही।
DMK और AAP की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल
बैठक में DMK और आम आदमी पार्टी (AAP) के शामिल न होने पर गठबंधन के भीतर से ही आवाजें उठने लगी हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद राजीव राय ने दोटूक कहा कि डीएमके जैसी बड़ी पार्टी की नाराजगी विपक्ष के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि उसे सहयोगी दलों की चिंताओं को जल्द से जल्द दूर करना चाहिए।
दूसरी ओर, डैमेज कंट्रोल में जुटे कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सफाई देते हुए कहा कि बैठक में 23 दलों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की थी। उन्होंने भरोसा जताया कि जो दल आज किसी कारणवश मौजूद नहीं थे, वे भी केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ गठबंधन के रुख के साथ मजबूती से खड़े हैं।
क्यों अहम है यह बैठक?
सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक विपक्षी दलों के बीच हालिया दिनों में दिखी कुछ कड़वाहट को दूर करने और आगामी राजनीतिक लड़ाई के लिए ‘रोडमैप’ तैयार करने के लिए बुलाई गई थी। ‘इंडिया’ ब्लॉक अब संसद के आगामी सत्र में सरकार को घेरने के साथ-साथ सड़क पर भी संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।
