नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी उथल-पुथल और चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्यों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की। इस उच्च स्तरीय बैठक में वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भी भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को और तेज करने तथा देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपायों पर गहरा मंथन किया गया।
बैठक के दौरान देश में निवेश को बढ़ावा देने, विकास की गति बनाए रखने और आम जनता के जीवन को आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझावों पर विचार-विमर्श हुआ।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और प्रशासनिक सुधारों पर जोर
परिषद के सदस्यों ने प्रधानमंत्री के समक्ष देश में कारोबार को अधिक सुगम बनाने के लिए आवश्यक सुधारों का खाका पेश किया। बैठक में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर चर्चा हुई:
- लालफीताशाही को कम करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल व पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया।
- देश में विदेशी और घरेलू निवेश को आकर्षित करने के लिए एक सुरक्षित और सुलभ वातावरण तैयार करने की रणनीति बनी।
- जमीनी स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए नए कदम उठाने के सुझाव दिए गए।
वैश्विक चुनौतियों के बीच ‘चमकता सितारा’ बना भारत
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया कई गंभीर आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों से जूझ रही है। परिषद के सदस्यों ने प्रधानमंत्री के सामने भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर होने वाले संभावित प्रभावों का एक विस्तृत आकलन प्रस्तुत किया, जिसमें निम्नलिखित चुनौतियों का जिक्र है:
- पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ता दबाव।
- ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव।
- बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव।
समन्वित रणनीति से बढ़ेगा रोजगार बैठक में इस बात को रेखांकित किया गया कि इन तमाम वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बना हुआ है। प्रधानमंत्री और परिषद ने सहमति जताई कि इस गति को बरकरार रखने के लिए आर्थिक सुधारों, रोजगार सृजन और नए निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक समन्वित रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।
